22 मई 2026 को ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के ज्ञान सरोवर,आबू राज में विज्ञान एवं अभियंता प्रभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देशभर से वैज्ञानिकों, अभियंताओं एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने सहभागिता कर आंतरिक मुस्कुराहट, कार्य क्षमता तथा आध्यात्मिक मूल्यों के माध्यम से जीवन एवं कार्य में संतुलन स्थापित करने पर गहन चर्चा की।
कार्यक्रम का उद्घाटन ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके सुदेश दीदी, राज्यसभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश जी, ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव बीके करुणा भाई, विज्ञान एवं अभियंता प्रभाग के अध्यक्ष बीके मोहन सिंघल भाई सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में राज्यसभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश जी ने कहा कि
विज्ञान ने पूरे विश्व को एक गांव में परिवर्तित कर दिया है, किन्तु मनुष्य के भीतर समाप्त होती मनुष्यता आज गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में ब्रह्माकुमारीज़ जैसी आध्यात्मिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। भारत केवल आर्थिक एवं तकनीकी शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर नहीं है, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम” और मानव कल्याण के संदेश के साथ विश्व को शांति का मार्ग दिखा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि
भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव यह संदेश देती रही है कि बाहरी परिवर्तन का आधार आंतरिक परिवर्तन है और यह कार्य ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान जैसी संस्थाएं प्रभावी रूप से कर रही हैं। उन्होंने दीदियों एवं संस्थान से जुड़े सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे समाज परिवर्तन के इस अभियान में आगे भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहें।
सम्मेलन में कर्म सिद्धांत एवं आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि
ईश्वर ने इस सृष्टि के लिए कर्म का अटल नियम बनाया है — जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल प्राप्त होगा। परमात्मा ज्ञान, शांति, प्रेम, पवित्रता, आनंद एवं सत्यता के सागर हैं और आत्मा भी उन्हीं गुणों की अधिकारी है।
इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में ए. भौमिक, डायरेक्टर ऑल इंडिया इंजीनियर्स दिल्ली, नेपाल सरकार के विकास एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग के संयुक्त सचिव राजकुमार श्रेष्ठा, प्रभाग के नेशनल कोऑर्डिनेटर भारत भूषण भाई, बीके पीयूष, बीके माधुरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
सम्मेलन में वक्ताओं ने “इंटरनल हार्मोनी” अर्थात आंतरिक सामंजस्य को जीवन एवं कार्यक्षमता की सफलता का मूल आधार बताया। गीता के “योगः कर्मसु कौशलम्” सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा गया कि योग के माध्यम से कर्मों में कुशलता आती है। साथ ही यह भी बताया गया कि संसार का सबसे बड़ा आविष्कार बाहरी मशीनें नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो मन और विचारों को सही दिशा देकर आंतरिक शांति प्रदान करती है।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति की पवित्रता बनाए रखने का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने सभी को समावेशिता, सकारात्मक सोच एवं आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाकर विश्व शांति एवं श्रेष्ठ समाज निर्माण में सहयोग देने का आह्वान किया।


























