22 मई 2026 को रूस स्थित भारतीय दूतावास विद्यालय, मॉस्को के शिक्षकों के लिए माइकमारा रिट्रीट सेंटर में एक विशेष आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को मानसिक सशक्तिकरण, आत्मिक संतुलन तथा सकारात्मक शिक्षण वातावरण के लिए राजयोग ध्यान के महत्व से अवगत कराना था।
मॉस्को का मयाक मीरा रिट्रीट सेंटर इन दिनों आध्यात्मिकता और शिक्षा के सुंदर संगम का साक्षी बना। भारतीय दूतावास विद्यालय के शिक्षकों ने ब्रह्माकुमारीज़ मॉस्को की निदेशिका बीके सुधा दीदी द्वारा आयोजित विशेष सत्रों में भाग लिया, जहाँ ध्यान, आत्म-प्रबंधन और विद्यार्थियों की भावनाओं को समझने की कला पर गहन एवं व्यवहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
सत्र के दौरान “कक्षा में स्वयं की भावनाओं एवं विद्यार्थियों की भावनाओं का सकारात्मक प्रबंधन” तथा “शैक्षणिक सफलता के लिए आत्मसमझ एवं ध्यान” जैसे विषयों को सरल एवं प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया गया। बीके सुधा दीदी ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से तनावमुक्त, संतुलित एवं सकारात्मक शिक्षण वातावरण विकसित करने के व्यावहारिक उपाय साझा किए। शिक्षकों ने पूरे मनोयोग से सत्र को सुना तथा प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय सहभागिता निभाई।
विद्यालय के प्राचार्य श्री बिघ्नेश्वर पटनायक ने आत्मिक अनुभवों एवं स्नेहभरे वातावरण से प्रभावित होकर पत्र लिखकर बीके सुधा दीदी, बीके विजय एवं पूरी टीम के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने शिक्षकों के मानसिक सशक्तिकरण, आत्मीय स्वागत तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन के प्रयासों की विशेष सराहना की।
इसी श्रृंखला में रिट्रीट सेंटर में आयोजित विशेष फैमिली रिट्रीट में मॉस्को सहित रूस के विभिन्न शहरों से आए ब्रह्माकुमारीज़ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रिट्रीट का शुभारंभ बीके सुधा दीदी के प्रभावशाली सत्र से हुआ। समापन सत्र में वरिष्ठ राजयोग शिक्षक बीके विजय ने “मन से सेवा” विषय पर अपने गहन आध्यात्मिक अनुभव साझा किए।
रिट्रीट के दौरान प्रतिभागियों ने प्रतिदिन मुरली चिंतन, रूह-रिहान, प्रश्नोत्तर सत्र, योगाभ्यास, दृष्टि देने की कला, मधुबन के अनुभवों की साझेदारी तथा आत्म-अभिमानी मौन की विशेष साधना का लाभ लिया। पूरे रिट्रीट में आत्मिक प्रेम, ईश्वरीय संग एवं सूक्ष्म शक्तियों की अनुभूति ने सभी प्रतिभागियों के मन को गहराई से स्पर्श किया।































