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लक्ष्मणगढ़ ने दिया भविष्य का संदेश – नशामुक्त पीढ़ी ही सशक्त भारत का आधार

लक्ष्मणगढ़ ने दिया भविष्य का संदेश – नशामुक्त पीढ़ी ही सशक्त भारत का आधार
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दिनांक 10 सितम्बर 2025 को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, लक्ष्मणगढ़ के सौजन्य से नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज को नशे की बुराइयों से अवगत कराना तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। प्रत्येक कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना एवं स्वागत गीत के साथ हुआ।

स्थल: चौधरी घासीराम पब्लिक स्कूल, एनएच-11, सीकर रोड, लक्ष्मणगढ़, राजस्थान

बहनों ने छात्रों को बताया कि नशा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक जीवन को भी कमजोर करता है। जीवन में सफलता और सुख तभी संभव है जब हम नशा मुक्त एवं अनुशासित जीवन जिएं। प्रेरणादायक उदाहरण और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से छात्रों ने गहरी रुचि दिखाई। अंत में 660 विद्यार्थियों ने नशा न करने एवं दूसरों को भी इससे बचाने की शपथ ली। विद्यालय के प्राचार्य ने भी इस पहल की सराहना की।

स्थल: एम.के. मेमोरियल एकेडमी हायर सेकेंडरी स्कूल, सेठ की कोठी के पास, एनएच-52, लक्ष्मणगढ़ (सीकर), राजस्थान

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। बहनों ने बताया कि नशे से दूर रहकर ही सच्चा सुख और सफलता प्राप्त की जा सकती है। प्रेरणादायक उदाहरण, प्रश्नोत्तर सत्र एवं प्रेरक संदेशों ने बच्चों को जागरूक किया। अंत में 790 विद्यार्थियों ने नशामुक्त जीवन जीने की शपथ ली।

स्थल: महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, लक्ष्मणगढ़ (सीकर), राजस्थान

यहाँ भी छात्रों को नशे के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया। प्रेरणादायक विचारों और प्रश्नोत्तर के बाद छात्रों ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया। कुल 335 विद्यार्थियों ने नशा न करने एवं दूसरों को इससे बचाने की शपथ ली। विद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम समाज को नशे के नुकसान से अवगत कराएँ।

स्थल: भूमा बड़ा, लक्ष्मणगढ़ (सीकर), राजस्थान

ग्राम स्तर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर नशे से होने वाले मानसिक, शारीरिक, सामाजिक, आर्थिक और नैतिक नुकसान बताए गए। निष्कर्ष निकला कि नशे का मुख्य कारण बढ़ता तनाव और अव्यवस्था है, जिसका समाधान केवल आध्यात्मिक सशक्तिकरण है। यदि व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचान ले तो समाज में संगठन शक्ति और भारत की गरिमा बढ़ा सकता है।

इस कार्यक्रम में युवाओं को बताया गया कि यदि वे अपनी छिपी प्रतिभाओं को पहचानें और नशा एवं मोबाइल की लत से दूर रहें, तो वे समाज को सुंदर बनाने में योगदान दे सकते हैं। कुल 198 लोगों ने नशा मुक्ति की शपथ ली।

कुल मिलाकर इन सभी कार्यक्रमों में 1983 विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने नशा मुक्ति का संकल्प लिया।

इन प्रेरक कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशामुक्त और अनुशासित जीवन ही स्वस्थ, सुखी और सफल जीवन की आधारशिला है।

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