दिनांक 18 नवम्बर 2025 को मुंबई के मीरा रोड की पावन धरा एक अत्यंत विशिष्ट और प्रेरणादायी आयोजन की साक्षी बनी। देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 10,000 किन्नरों का वार्षिक संगठन मेला जब मीरा रोड पर सजा, तो वातावरण मानो विविधता, सौहार्द और आत्मिक निकटता के रंगों से भर उठा। यह अद्भुत संगम मानवता, अपनत्व और आध्यात्मिकता का जीवंत उत्सव बन गया।
इस विशेष सम्मेलन में ब्रह्माकुमारीज मीरा रोड सेवा केंद्र की प्रभारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी.के. रंजन तथा बी.के. शोभा ने परमात्मा का अत्यंत स्नेहपूर्ण व प्रेरणादायी संदेश प्रदान किया। दीदीजी ने बताया कि आत्मा के मूल गुण शांति, प्रेम और पवित्रता हैं। उन्होंने कहा कि मन की वास्तविक चाहत शांति है, और यह शांति राजयोग की साधना से सहज रूप से प्राप्त की जा सकती है। दीदीजी के आगमन पर कई किन्नरों ने स्वयंस्फूर्त आनंद में ‘ओम शांति’ का मधुर उच्चारण शुरू कर दिया, जिससे सभा का वातावरण और अधिक दिव्य हो उठा।
किन्नर समुदाय से जुड़े कई सदस्य पहले से ही ब्रह्माकुमारीज की शिक्षाओं और राजयोग ध्यान से परिचित थे। कुछ ने बताया कि वे अपने-अपने शहरों के ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्रों से वर्षों से जुड़े हैं। यह सुनकर वातावरण और अधिक अपनत्व, प्रेम और आपसी निकटता से भर गया।
बी.के. रंजन दीदी ने अत्यंत सरलता और मधुरता से समझाया कि हम सभी परमात्मा के बच्चे हैं—एक ही विशाल परिवार के सदस्य। भिन्न शरीर और भिन्न भूमिकाओं के बावजूद आत्मा की लौ एक है, और परमात्मा सबका समान रूप से प्रेममय पिता है।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉक्टर सलमा ने भी ब्रह्माकुमारीज की सेवाओं की सराहना करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी हैं और अनेक अवसरों पर सेवा केंद्रों में जाकर आध्यात्मिकता का अनुभव करती रही हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि ब्रह्माकुमारीज अनेक वर्षों से किन्नर समुदाय के साथ सेवा, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और मेडिटेशन के माध्यम से कार्य कर रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान किन्नर समाज में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लता नायक, अरुणा नायक और रंजीत नायक को सम्मानपूर्वक शुभ–स्मृति प्रदान की गई। उनके योगदान को पूरे समुदाय ने सराहा।
मीरा रोड का यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं था—यह मानवता, एकता, सम्मान और परमात्मा के स्नेह का एक सशक्त संदेश बनकर उभरा। उपस्थित सभी ने इस मिलन को एक आध्यात्मिक अनुभव–दिवस के रूप में हृदय से संजोया।



























