प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मैसूर उपवलय द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक सेवा एवं नैतिक मूल्यों के प्रसार हेतु अनेक भव्य एवं प्रभावशाली कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने न केवल स्थानीय समाज बल्कि विभिन्न वर्गों के हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस वर्ष की एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में, मैसूर उपवलय की मुख्य संयोजक राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी जी को उनकी लगभग 58 वर्षों की निस्वार्थ एवं समर्पित आध्यात्मिक सेवा के लिए कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा गौरव डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कर्नाटक के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति माननीय श्री तावरचंद गहलोत जी द्वारा कुलपति प्रोफेसर शरणप्पा वी. हलसे की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर लगभग 2000 गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों एवं आध्यात्मिक साधकों की उपस्थिति रही। लक्ष्मी जी ने अपने संबोधन में आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश देते हुए सभी को आंतरिक शांति की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया।

संस्था की पूर्व प्रमुख राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी डॉ. प्रकाशमणि जी की पुण्यतिथि पर सेवा भाव से ओतप्रोत विशाल रक्तदान शिविरों का आयोजन उपवलय के विभिन्न केंद्रों पर किया गया। इन शिविरों में आम नागरिकों, युवाओं एवं ब्रह्माकुमार-कुमारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल मिलाकर लगभग 1000 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जो समाज के जरूरतमंदों के लिए अमूल्य योगदान सिद्ध हुआ। रक्तदाताओं को संस्था एवं रक्त बैंक द्वारा प्रमाण पत्र, हल्का नाश्ता एवं पेय पदार्थ प्रदान कर सम्मानित किया गया, जिससे सेवा के प्रति उनकी प्रेरणा और भी बढ़ी।

दूसरे विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर 21 दिसंबर 2025 को मैसूर विश्वविद्यालय के ओपन एयर थिएटर में एक अत्यंत प्रभावशाली कार्यक्रम आयोजित किया गया। सर्द सुबह के वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 3000 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान ध्यान की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को विस्तार से समझाया गया तथा सभी को राजयोग ध्यान की विधि का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने ध्यान के माध्यम से गहन शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया, जो उनके जीवन में स्थायी परिवर्तन का आधार बना।

नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत मैसूर एवं आसपास के क्षेत्रों के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विभिन्न कार्यालयों में जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। इस अभियान के मुख्य वक्ता डॉ. सचिन परब (मुंबई) ने अत्यंत प्रभावशाली एवं व्यावहारिक प्रस्तुतियों के माध्यम से युवाओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके कार्यक्रमों से हजारों लोगों ने लाभ प्राप्त किया। इसी क्रम में नई दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता ने “एक विचार की शक्ति” विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में लगभग 200 विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे, जिन्होंने इच्छाशक्ति की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक व्याख्या को सराहा और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “महिलाओं और परिवार का समग्र स्वास्थ्य” विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 250 महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी की। इस कार्यक्रम में शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला गया। साथ ही महिलाओं के आत्मविश्वास एवं सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करने हेतु वेशभूषा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विजेताओं को सम्मानित किया गया।

ब्रह्मा बाबा की पुण्यतिथि पर सरोवर सेंटर में ब्राह्मण परिवार के लिए एक विशेष आध्यात्मिक संगम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लगभग 500 ब्राह्मण एकत्रित हुए और ब्रह्मा बाबा के त्याग, तपस्या एवं सेवा के जीवन को स्मरण करते हुए गहन योगाभ्यास किया। वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक एवं शांतिमय रहा, जिसने सभी को आत्मिक ऊर्जा से भर दिया।

महाशिवरात्रि एवं संस्था की 90वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में “सोमनाथ दिव्य दर्शन” नामक एक भव्य आध्यात्मिक मेले का आयोजन किया गया, जो मैसूर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। इस मेले का उद्घाटन विश्व वकलिका महासंस्थान मठ, बेंगलुरु के पीठाचार्य पूज्य डॉ. निश्चलंदनाथ महास्वामी जी द्वारा किया गया। उन्होंने अपने आशीर्वचन में आध्यात्मिक जीवन के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक श्री के.सी. शिवप्पा एवं अंतरराष्ट्रीय भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. वसुंधरा दरे स्वामी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ईश्वरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मैसूर उपवलय की 60वीं वर्षगांठ भी अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस कार्यक्रम का उद्घाटन योग नरसिम्हा स्वामी मंदिर के संस्थापक प्रोफेसर भाषम स्वामी जी द्वारा किया गया। राजयोगिनी डॉ. बी.के. लक्ष्मी जी ने सभी को आशीर्वचन देते हुए आध्यात्मिक जीवन अपनाने की प्रेरणा दी और दिव्य उपहार प्रदान किए। इस उपलक्ष्य में एक भव्य शांति एवं सद्भावना जुलूस निकाला गया, जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। यह जुलूस आम जनता के लिए आकर्षण का केंद्र रहा और इसके माध्यम से विश्व शांति एवं एकता का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित किया गया।

अंतरधार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने हेतु एक अंतरधार्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें इस्लाम, क्रिश्चियन, बौद्ध, सिख एवं बहाई धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उद्घाटन विराजपीठ स्थित अलमेरी कलंशरी मठ के प्रमुख पूज्य श्री शांत मलिकार्जुन स्वामी जी द्वारा किया गया। सभी धर्मगुरुओं ने अपने विचार साझा करते हुए आपसी प्रेम, सहिष्णुता एवं एकता का संदेश दिया, जिससे समाज में सद्भावना का वातावरण सुदृढ़ हुआ।

“सोमनाथ दिव्य दर्शन” मेले का समापन समारोह 22 फरवरी को भव्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें बेंगलुरु ग्रामीण जिले के सांसद एवं प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सी.एन. मंजुनाथ जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्हें ईश्वरीय प्रशस्ति से सम्मानित किया गया। उन्होंने संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए इन प्रयासों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इसके अतिरिक्त, केरल के कन्नूर, कालीकट एवं अन्य केंद्रों में भी महाशिवरात्रि के अवसर पर विविध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर लाभ प्राप्त किया।

इस प्रकार, मैसूर उपवलय द्वारा आयोजित इन सभी कार्यक्रमों ने आध्यात्मिक जागरूकता, सामाजिक सेवा, नैतिक मूल्यों एवं विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ये प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुए।


















