14 जून 2026 को गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ओआरसी) में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं विचार-प्रेरक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें भारतीय विदेश सेवा के पूर्व राजनयिक डॉ. दीपक बोरा ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय गौरव तथा वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक एवं डिजिटल क्षमता पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. दीपक बोरा का स्वागत ब्रह्माकुमारीज़ की राजयोग शिक्षिकाओं बी.के. हुसैन एवं बी.के. ईशु सहित अन्य बी.के. सदस्यों ने आत्मीयता के साथ किया। ओआरसी की निदेशिका बी.के. आशा दीदी एवं अन्य पदाधिकारियों ने उनका अभिनंदन करते हुए उन्हें ईश्वरीय सौगात एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
अपने दौरे के दौरान डॉ. बोरा ने ओआरसी परिसर का अवलोकन किया और ध्यान कक्ष (मेडिटेशन रूम) में कुछ समय व्यतीत कर गहन शांति एवं आत्मिक अनुभव का अनुभव किया। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा समाज में शांति, सकारात्मकता एवं मानवीय मूल्यों के प्रसार हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की। साथ ही उन्होंने संस्था के इतिहास एवं इसकी आध्यात्मिक शिक्षाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा कि
भारत केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि हर भारतीय के हृदय में बसने वाली मातृभूमि है। उन्होंने भारत की प्राचीन चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए चाणक्य के विचारों का संदर्भ दिया, जिसमें नेतृत्व, कूटनीति, सैन्य शक्ति, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, अवसंरचना और आत्मविश्वास जैसे तत्वों को राष्ट्र की महानता के लिए आवश्यक बताया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक भारत डिजिटल लेन-देन और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर रहा है, जो देश की शक्ति और क्षमता को दर्शाता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारीज़ के सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने इस संवाद एवं आध्यात्मिक संगम को अत्यंत प्रेरणादायक एवं राष्ट्र चेतना को जाग्रत करने वाला अनुभव बताया।
डॉ. दीपक बोरा के विचारों ने भारत की सांस्कृतिक आत्मा, आध्यात्मिक मूल्यों और वैश्विक भूमिका पर एक सार्थक विमर्श को प्रोत्साहित किया, जो उपस्थित सभी प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।






























