ब्रह्माकुमारीज़ के मेडिकल विंग द्वारा मुख्यालय में आयोजित राष्ट्रीय नर्सिंग सम्मेलन का समापन प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक सत्रों के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में देशभर से आए नर्सिंग अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। समापन अवसर पर नर्सिंग शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में आध्यात्मिक मूल्यों, करुणा, आत्मबल तथा राजयोग मेडिटेशन की भूमिका पर विशेष मंथन किया गया।
समापन समारोह में ब्रह्माकुमारीज़ के अतिरिक्त महासचिव एवं मेडिकल विंग के उपाध्यक्ष बीके डॉ. प्रताप मिधा तथा मेडिकल विंग के सचिव बीके डॉ. बनारसी लाल ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि करुणा, समर्पण और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण सेवा का श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि सम्मेलन में प्राप्त आध्यात्मिक शिक्षाओं एवं राजयोग मेडिटेशन को अपने दैनिक जीवन एवं व्यावसायिक सेवा में निरंतर अपनाकर समाज में शांति और मानवता का संदेश फैलाएं।
उन्होंने विशेष रूप से सेल्फ केयर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि
दूसरों की सेवा के साथ-साथ स्वयं को मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाना भी अत्यंत आवश्यक है। राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को आत्मबल प्रदान करता है तथा कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना सहजता से करने की शक्ति देता है। उन्होंने सभी नर्सिंग कॉलेजों एवं अस्पतालों में ऐसे आध्यात्मिक नर्सिंग सम्मेलनों के आयोजन का भी आह्वान किया।
कार्यक्रम में मेडिकल विंग के कार्यकारी सदस्य डॉ. सचिन परब, राजकीय नर्सिंग कॉलेज जयपुर की व्याख्याता एवं राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की अध्यक्ष डॉ. समता सोनी, जेपी ब्रदर्स मेडिकल पब्लिकेशन, मुंबई की प्रबंध संपादक प्रो. डॉ. वीता लखानी, एसएलएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग, आबू रोड की प्राचार्य भानुप्रिया तथा टीबी हॉस्पिटल, पुणे की मैट्रन सुरेखा नायक ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने नर्सिंग शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिकता, आत्म-सशक्तिकरण तथा मानवीय संवेदनाओं के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया।
अतिथियों ने सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि
यह अपने आप में एक अनूठा आयोजन रहा, जहाँ प्रतिभागियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला आध्यात्मिक उपहार भी प्राप्त हुआ। उन्होंने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रातःकालीन अमृतवेला, राजयोग मेडिटेशन तथा आध्यात्मिक दिनचर्या ने उनके जीवन में नई ऊर्जा, शांति और उत्साह का संचार किया।
सम्मेलन का सफल संचालन ग्लोबल हॉस्पिटल की नर्सिंग चीफ बीके रूपा ने किया।समापन सत्र में देशभर से आए नर्सिंग अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि
राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से उन्हें आत्मबल, मानसिक शांति, सकारात्मक सोच तथा रोगियों की अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी सेवा करने की प्रेरणा मिली। प्रतिभागियों ने कहा कि सम्मेलन के दौरान प्राप्त आध्यात्मिक ज्ञान और व्यावहारिक शिक्षाओं को वे अपने-अपने अस्पतालों एवं नर्सिंग संस्थानों में लागू करेंगे, जिससे रोगियों को शारीरिक देखभाल के साथ मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग भी बेहतर ढंग से प्रदान किया जा सके।
प्रतिभागियों ने सम्मेलन परिसर की स्वच्छता, अनुशासित वातावरण, दिव्य ऊर्जा एवं आत्मीयता की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की। कई प्रतिभागियों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सहभागी बनने तथा अपने संस्थानों में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।
राष्ट्रीय नर्सिंग सम्मेलन का यह समापन सत्र नर्सिंग सेवा को आध्यात्मिक मूल्यों, आत्म-सशक्तिकरण, करुणा और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।
























