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क्या हमारा आत्म सम्मान (सेल्फ एस्टीम), हमारे जीवन में होने वाली सफलता और असफलता पर निर्भर करता है? (भाग 1)

क्या हमारा आत्म सम्मान (सेल्फ एस्टीम), हमारे जीवन में होने वाली सफलता और असफलता पर निर्भर करता है? (भाग 1)

आजकल हमारा जीवन एक रेस की भांति हो गया है, जिसमें हम हर पल भागने के साथ साथ जीतना चाहते हैं। और साथ ही, हम फिजिकल लेवल पर मिलने वाली सफलता; चाहे वह हमारी शिक्षा में, हमारे करियर में, किसी रिश्ते में या किसी भी खेल में जीतने पर या फिर अन्य चीजों में, हमारी खुशी का आधार बन गए हैं। दूसरी ओर, जब हम जीवन के इन पहलुओं में से किसी में भी सफल नहीं हो पाते या अपना बेस्ट नहीं दे पाते हैं, तो हम उदास और निराश महसूस करते हैं। सबसे दुखद बात है कि, हम अपने जीवन में होने वाले इन सब उतार चढ़ाव के कारण अपना आत्म सम्मान व स्वाभिमान डिसाइड करते हुए ये भूल जाते हैं कि, ये हमारे जीवन के अस्थायी पहलू हैं। हम स्वयं को और आस पास के लोग भी हमें इसी आधार पर जज करते हैं, और एक सफल और असफल व्यक्तिव के रूप में हमारा लेबल फिक्स करते रहते हैं, जिसकी कोई आवश्यकता नहीं होती है। यहां तक कि, आज हमारे बच्चे भी इस वजह से डिस्टर्ब हो रहे हैं, जब हम या फिर अन्य लोग, उन्हें उनकी पढ़ाई में, उनके खेल में या फिर किसी अन्य एक्टिविटी में, सफलता और असफलता के आधार पर जज करते हैं। तो आइए, अपने जीवन में होने वाली इस समस्या को दूर करने के लिए, कुछ सॉल्यूशन को जानें –

 

  1. हार जीत जीवन का एक पहलू है… अगर मैं खुश और संतुष्ट हूं, तो मैं एक विजेता हूं – यह समझ सबसे इंपोर्टेंट है कि, इस सोसाइटी में खुद को प्रूव करने की रेस में, हमने हमारे जीवन को इतना कठिन बना दिया है, कि अब हम स्वयं इस कैट रेस से बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पा रहे हैं। जहाँ भी देखो, चाहे वह हमारी पर्सनल लाइफ, प्रोफेशनल लाइफ या हमारे स्कूल और कॉलेज की लाइफ के बारे में हो, सभी फिजिकल लेवल पर सफलता की बात करते हैं। कई बार तो लोग इसकी वजह से अंदर से दुखी महसूस करते हैं दर्द में रहते हैं, और खुशी को महसूस नहीं कर पाते हैं। हम ये भूल चुके हैं कि, हम एक आध्यात्मिक प्राणी या आत्मा हैं और हमारे लिए जीतना माना; शांति, प्रेम, आनंद और शक्ति जैसे मूल गुणों से भरपूर होकर प्योर और पॉजिटिव बनना है। साथ ही, जब हम केवल एक्सटर्नल सफलता और असफलता पर कंसंट्रेट करते हैं, तो हम जीवन का रियल आनंद लेने में पीछे रह जाते हैं, और अस्थाई खुशियों का पीछा करते रहते हैं। और साथ ही आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से कमजोर होते हुए, अपने रियल गुणों से भी खाली होते जाते हैं।

(कल जारी रहेगा…)

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