राजयोग द्वारा आत्मा को शुद्ध बनाएं

हम सभी आध्यात्मिक ऊर्जा व आत्माएँ हैं, जो विश्व नाटक में अलग-अलग समय पर जन्म लेती हैं और हर जन्म में अनेक कर्म करती हैं। आत्मा का मूल निवास आत्मलोक (परमधाम) है, जहाँ से वह इस भौतिक संसार में आती है और अलग-अलग शरीरों द्वारा अपने कई भूमिका निभाती है। हर आत्मा के कर्म उसकी मूल पवित्रता और उसके विशेष संस्कारों के अनुसार अलग होते हैं। सभी आत्माएँ अलग-अलग जन्मों में अनेक संबंधों से गुजरती हैं और अपने साथ यात्रा करने वाली आत्माओं को सुख और दुख देती हैं। हर जन्म में आत्माएँ प्रकृति के पाँच तत्वों के साथ भी संबंध बनाती हैं। वे प्रकृति को जैसी ऊर्जा देती हैं – सकारात्मक या नकारात्मक – उसी के अनुसार उसके साथ कर्मों का हिसाब बनता है। यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण कारण है, जो तय करता है कि जन्म-मरण की यात्रा में आत्मा कितनी अपवित्र होती है। इसके साथ-साथ, अन्य गलत कर्मों और संबंधों में किए गए नकारात्मक कर्मों का भी प्रभाव पड़ता है। हजारों वर्षों से संसार भर के अनेक लोग यह सोचते आए हैं कि आत्मा स्वयं को शुद्ध कैसे करे और फिर से आत्मलोक में कैसे लौटे। आत्मा जब तक पूरी तरह शुद्ध नहीं होती, तब तक वह अपने मूल घर वापस नहीं जा सकती।
परमात्मा हमारे सर्वोच्च पिता और परम आत्मा हैं। वे मनुष्य आत्माओं की तरह जन्म-मरण के चक्र में नहीं आते। इसलिए उनकी पवित्रता कभी कम नहीं होती और वे सदा पवित्रता के सागर हैं। वे ही एकमात्र ऐसे हैं जिन्हें हर मानव आत्मा के सभी जन्मों, उसके कर्मों और उसकी मूल शुद्ध अवस्था का पूरा ज्ञान है। वे जानते हैं कि आत्म-अभिमान में किए गए कर्म सही कर्म हैं, और देह-अभिमान में किए गए कर्म गलत हैं, जो आत्मा को अपवित्र बना देते हैं। वर्तमान समय में, जब कलियुग के अंत में आत्माएँ बहुत अधिक अपवित्र हो गई हैं, तब परमात्मा राजयोग मेडिटेशन सिखाते हैं। यह स्वयं को आत्मा समझने और परमात्मा को याद करने की विधि है। इस ध्यान योग में आत्मा स्वयं को परमात्मा के सामने अनुभव करती है और परमात्मा को एक सर्वोच्च ज्योति बिंदु के रूप में महसूस करती है। फिर आत्मा उनसे निकलने वाली सकारात्मक आध्यात्मिक शक्ति को ग्रहण करती है। इससे आत्मा पर पिछले जन्मों के नकारात्मक कर्मों के संस्कार साफ होने लगते हैं। परिणामस्वरूप आत्मा फिर से शुद्ध, हल्की और पवित्र बन जाती है।
आज का अभ्यास
आज स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा से जुड़ने का अभ्यास करें, ताकि उनके प्रेम और शक्ति से अपने अंदर की पवित्रता को पुनः जागृत कर सकें।
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