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क्या हमारा आत्म सम्मान (सेल्फ एस्टीम), हमारे जीवन में होने वाली सफलता और असफलता पर निर्भर करता है? (भाग 2)

क्या हमारा आत्म सम्मान (सेल्फ एस्टीम), हमारे जीवन में होने वाली सफलता और असफलता पर निर्भर करता है? (भाग 2)

  1. आध्यात्मिकता हमें हमेशा विजयी बनाती है – आध्यात्मिकता हमें सिखाती है कि, हम स्वयं को कैसे ज्ञान की आंखो के द्वारा परखें। हमारी फिजिकल आंखें स्वयं को और हमारी फिजिकल रियलिटीज जैसे उम्र, लिंग, रंग रूप, बाहरी व्यक्तित्व, राष्ट्रीयता, रिश्ते नाते, धर्म, कैरियर, रोल और धन संपत्ति आदि को दिखाती हैं। जब हम स्वयं को एक स्प्रिचुअल एनर्जी या आत्मा के रूप में देखना और महसूस करना शुरू करते हैं तो अपने आध्यात्मिक महत्व को समझने के साथ-साथ, अपने जीवन में परमात्मा के महत्व को समझने से, बाहरी जीवन जीने के बजाय, हम गहराई में जाकर खुद को बेहतर समझ पाते हैं। अपने साथ साथ, हम अन्य आत्माओं के रोल और जीवन की घटनाओं को भी अलग तरह से देखते और समझ पाते हैं कि, ये सब कुछ समय के लिए है इसलिए हमारी खुशी का आधार ये सब चीजें नहीं हो सकती हैं। अंत में, हर दिन परमात्मा के ज्ञान को सुनने और आत्मसात करने से, हम बाहरी रूप से सफलता प्राप्त करने के बारे में न सोचकर, परमात्मा के साथ-साथ अन्य लोगों के दिलों को जीतना की कला सीखते हैं और साथ ही अपनी बुराइयों और कमियों को दूर करके एक परफेक्ट प्राणी बनने की कोशिश कर पाते हैं जिसे परमात्मा के साथ-साथ हर कोई प्यार करता है जो कि, हमारे अंदर की सुंदरता के आधार पर होता है, नाकि बाहरी सफलता और असफलता के आधार पर। 

 

  1. जीवन में हर प्रकार की सफलता व पॉजिटिविटी के लिए, स्वयं को और दूसरों को सम्मान दें – 

आज से, जब भी आपका बच्चा या आपके ऑफिस के सहयोगी या फिर आपकी पसंदीदा स्पोर्ट्स टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती है, तो उनके लिए पॉजीटिव शब्द कहें, पॉजीटिव थॉट्स  और भावनाएँ रखें। साथ ही हर छोटी से छोटी चीज़ों को महत्व दें, परन्तु उसके रिजल्ट के बारे में न सोचें। आध्यात्मिक ज्ञान कहता है कि, अपने जीवन में पॉजीटिव कार्यों को अच्छी तरह से करें और बदले में उनके परिणाम के बारे में न सोचें। इस सोच को अपने जीवन में एप्लाई करते हुए, हर एक कार्य परमात्मा की याद में करें और उसे करते हुए स्वयं भी खुश रहें और उसके द्वारा दूसरों को भी खुशी दें। दुनियावी चीजों और बड़ी दिखने वाली बातों में, सफलताओं के आधार पर अपना आत्मसम्मान और खुशी को डिपेंड न होने दे, क्योंकि दिखाई देने वाली, ये बड़ी बड़ी सफलताएं अस्थायी होती हैं और हमारे साथ हमेशा नहीं रहतीं। तो जितना अधिक हम किसी रिज़ल्ट की परवाह किए बिना, हर कर्म का आनंद लेना शुरू कर देंगे, उतना ही अधिक हम विजयी महसूस करेंगे और साथ ही ये पॉजिटिव एनर्जी हम अपने घर, कार्यस्थल और समाज में दूसरों तक भी पहुंचा पाएंगे, जिसकी आज की दुनिया में बहुत अधिक आवश्यकता है। वरना आज इस कंपटीशन से भरी दुनिया में लोगों की आध्यात्मिकता धीरे धीरे कम होती जा रही है जिसकी वजह से वे न तो खुद खुश रह पाते हैं, और  न ही दूसरों को खुशी दे पाते हैं।

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