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15th march soul sustenance hindi

ब्रह्माकुमारीज़ संस्था में ज्ञान के सोर्स का आधार क्या है? (भाग 3)

पिछले दो दिनों के संदेशों में हमने जाना, कि ब्रह्माकुमारीज़ में ज्ञान का सोर्स; सर्वोच्च सत्ता परमात्मा ही हैं नाकि कोई मनुष्यात्मा। अब दूसरा सवाल यह उठता है कि दुनिया में प्रचलित मान्यताओं और विचार धाराओं को न मानकर हम कैसे परमात्मा द्वारा बताए गये सच पर भरोसा करें? आज बहुत सारी मान्यताओं में से आत्मा, परमात्मा, विश्व ड्रामा – उसकी ड्यूरेशन के साथ-साथ, अलग-अलग युगों के बारे में, ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसके विकास के बारे में, उसकी आयु और अतीत में जो कुछ भी इस दुनिया में था, इनमें से कुछ मान्यताएँ परमात्मा द्वारा बताई गई बातों से अलग क्यों हैं? आइए इसको समझते हैं-

  1. आज कोई भी मनुष्यात्मा दुनिया की पूरी सच्चाई, इसके पूरे इतिहास और पृष्ठभूमि के हर एक तथ्य को 100% सटीकता के साथ नहीं जानती। क्योंकि विश्व ड्रामा का यह नियम है कि कोई भी मनुष्यात्मा एक बार शरीर का चोला बदल कर जब दूसरा जन्म लेती है तो वह अपने पिछले जन्म और उससे जुडी कई घटनाओं को पूरी तरह से भूल जाती है। केवल परमात्मा ही जन्म और पुनर्जन्म के चक्र में नहीं आते हैं और परमधाम; यानि उनके रहने का स्थान, से पूरे विश्व के ड्रामा को देखते हैं, और साथ ही और वे ब्रह्मांड के आदि, मध्य और अंत को जानते हैं। और केवल एक वह ही जानते है कि विश्व ड्रामा कैसे एक चक्र में रिपीट होता रहता है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में, कुछ लोगों द्वारा सृष्टी के इस चक्रीय नियम के इतिहास के बारे में बताया गया है, लेकिन उससे भी अधिक एक सीधी रेखा में चलने वाले नियम को माना जाता है। जबकि चक्रीय समय के नियम के अनुसार; समय एक चक्र है जिसका कोई आरंभ और अंत नहीं है। इसका अर्थ है कि समय निरंतर एक क्षण से दूसरे क्षण में अनंत काल तक गतिमान रहता है। दूसरी ओर, रेखीय समय का नियम कहता है कि समय ब्रह्मांड की शुरुआत से लेकर अंत तक एक सीधी रेखा है। परंतु परमात्मा हमें स्पष्ट रूप से समझाते हैं कि कैसे समय चक्रीय है नाकि रैखिक और कैसे विश्व ड्रामा पवित्रता, शांति और खुशी जैसे गुणों (स्वर्ग) के एक चरण से अपवित्रता, अशान्ति और दुःख जैसे विकारों (नरक) के चरण में बदलता है। परमात्मा अपने आध्यात्मिक ज्ञान, पवित्रता और शक्ति के साथ इस विकारों (नरक/ रात) की दुनिया को गुणों (स्वर्ग/ दिन) में बदल देते हैं और यह दिन (स्वर्ग) और रात (नरक) का विश्व ड्रामा, रात- दिन के डेली चक्र की तरह बार-बार खुद को दोहराता रहता है। आज की भौतिक दुनिया; परमात्मा द्वारा बताए गये, दुनिया के चक्रीय समय के नियम की तुलना में रेखीय समय के नियम को ज्यादा मान्यता देती है और उससे संबंधित मानव अस्तित्व की सभी घटनाओं और तथ्यों को अलग तरीके से देखती है।

(कल जारी रहेगा…)

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