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क्रोध पर कंट्रोल पाने के 5 उपाय (भाग 3)

क्रोध पर कंट्रोल पाने के 5 उपाय (भाग 3)

  1. “आई एम राइट कॉन्शसनेस” को छोड़ें– आपसी रिश्तों में गुस्से के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक अहंकार है कि, मैं ही सही हूं और दूसरा व्यक्ति गलत है। जितना ज्यादा अहंकार, उतना ज्यादा गुस्सा। बहुत से लोग, जो अपने परिवार में या ऑफिस में बहुत मूडी होते हैं, और हमेशा दूसरे लोगों पर चिल्लाते हैं, उन्हें गलत समझते हैं, वे बहुत ही अहंकारी/एगोइस्टिक होते हैं। साथ ही, गुस्से का एक बहुत ही सामान्य और नेगेटिव रिएक्शन है, दूसरों के कार्यों पर कमेंट या टीका टिप्पणी करना और हमेशा अपनी सोच और कार्यों को ही सही समझना और दूसरों को जताना। दूसरी ओर, अपने अहंकार का त्याग करने वाले व्यक्ति का व्यवहार और स्वभाव बहुत मधुर और दयालु होगा, भले ही सामने वाले ने बहुत कुछ गलत किया हो। साथ ही, सामने वाले व्यक्ति को इनोसेंट और उनके बारे में क्रिटिकली ज्यादा न सोचने के लिए, एक बहुत ही आसान प्रैक्टिस है कि, प्रतिदिन मिलने वाले प्रत्येक व्यक्ति में कम से कम एक विशेषता को देखें। इस प्रकार के पॉजिटिव विज़न से हम क्रोधमुक्त बनते हैं, और नेगेटिव परिस्थितियों में भी हम लोगों की पॉजिटिविटी को प्रिफरेंस देते हुए, उनकी कमियों और कमजोरियों पर ध्यान नहीं देंगे।
  2. क्रोधमुक्त होने के लिए तनाव मुक्त रहें- आज हम सभी का जीवन, कई तरह की नेगेटिव परिस्थितियों और उतार-चढ़ाव से भरा हुआ है, जो हमारे मन को अशांत और तनावग्रस्त कर देते हैं। तनाव का मुख्य कारण, हमारे मन में चलने वाले बहुत सारे क्यों, क्या, कब और कैसे जैसे विचारों से भरे सवाल हैं। मन में जितने अधिक प्रश्न और अनसुलझी समस्याऐं होंगी, उतना ही मन टॉक्सिक शब्दों और कार्यों के द्वारा रिएक्ट करेगा। जीवन है तो समस्याएँ तो सदा रहेंगी, लेकिन उनसे हमारा लगाव/जुड़ाव और हमारी इच्छा अनुसार उनके सही समय पर और सही तरीके से सॉल्व होने का इंतजार में इंपेशंट होना ही गुस्से को जन्म देता है। कई मामलों में, गुस्सा एक बोतल में बंद तनाव की तरह है, जो समय-समय पर फूट पड़ता है। मेडिटेशन प्रैक्टिस की टेक्निक के द्वारा प्राप्त पॉजिटिव थिंकिंग और मन की शांति से, मन के तनाव को दूर रखा जा सकता है। और क्रोध मुक्त होने से ही तनाव मुक्त हो सकते हैं।

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