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29th march soul sustenance hindi

संतुष्टता का गहना पहनो (भाग 3)

सन्तुष्टता का गुण, अपने भीतर के खजाने और प्राप्तियों को बढ़ाने से बढता है। जब भी आपके जीवन में कोई नेगेटीव परिस्थिति आती है, तो उस समय अपने मन में, अपनी प्राप्तियों और जीवन में मिले खजानों के बारे में सोचने से पोजिटिवीटी के साथ संतुष्टता भी आएगी। मान लीजिए, आपके जीवन में बहुत कठिन परिस्थिति आती है, जो आपके मन को नेगेटीविटी से भर रही है तब उस समय अपने अंदर की आठ शक्तियों के खजाने के बारे में सोचें और उन्हें फील करें, साथ ही अपने जीवन में घटने वाली अच्छी परिस्थितियों के बारे में सोचें, परमात्मा के साथ अपने रिश्ते के बारे में सोचें। इसके अलावा, अपने करीबी लोगों के साथ; अपने संबंधों के बारे में सोचें और उनके साथ अनुभव किए गए प्यार और खुशी के पल और उनसे प्राप्त होने वाली शुभकामनाओं के बारे में भी सोचें। अपने अंदर भरे हुए आध्यात्मिक ज्ञान के बारे में सोचें, जो सभी समस्याओं के समाधान की चाभी है। और यदि आप सच्चे हैं और अच्छाई से भरपूर हैं, तो कोई भी नेगेटीव दृश्य हमेशा के लिए नहीं रह सकता। साथ ही अपना समय अलग-अलग तरीकों से दूसरों की सेवा करने में दें। इन कुछ तरीकों से आप उदास होने और खालीपन महसूस करने के बजाय, संतोष का अनुभव करेंगे ।

साथ ही, अपने आने वाले भविष्य को एक पोजिटीव धारणा के साथ देखने से, हमारा मन स्थिर और संतुष्ट होगा । निराश होना और आशा छोड़ देना, आपको दुःख और असंतोष की ओर ले जाएगा। हमेशा याद रखें कि, आप अपने जीवन में हर चीज के बारे में जितने अधिक पोजिटीव होंगे, उतनी ही जल्दी आपके जीवन के सभी नेगेटीव दृश्य पोजिटीव में बदल जाएंगे। इसके विपरीत, यदि हम अपने जीवन में, जितना अधिक नेगेटीव होंगे, उतना ही नेगेटीवीटी को आकर्षित करेंगे और जीवन में घटने वाली घटनाएं भी दुःख का कारण बनेंगी । इसलिए, हमेशा मन से हल्के रहें, कम सोचें, अच्छा सोचें, पोजिटीव सोचें और जीवन में आने वाली, किसी भी स्थिति में भी सदा पोजिटीव सोच रखकर, संतुष्टता का ऐसा रत्न बनें, जो चारों ओर हर तरफ खुशियाँ बिखेरता है

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