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भयमुक्त बनने के 5 तरीके

भयमुक्त बनने के 5 तरीके

1. सेल्फ रिस्पेक्ट/ आत्मसम्मान की शक्तिशाली अवेयरनेस   में रहना

जीवन में डर के ऊपर जीत पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है स्वयं की आध्यात्मिक महत्व पूर्णता को गहराई से समझना और हमारे अंदर क्या-क्या स्पेशलिटी मौजूद हैं जैसे कि, हमारा विवेक, हमारी शक्तियां, पर्सनल व्यक्तित्व, हमारी क्वालिटी और इसके अलावा अपने जीवन में आने वाली सभी परिस्थितियों को एक डिटेच्ड ऑब्जर्वर व साक्षी दृष्टा के रूप में देखना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि, हम इन सभी परिस्थितियों को अपने अटेनमेंट द्वारा ओवरकम कर सकते हैं।

 

2. परमपिता परमात्मा को याद करना और उनकी शक्तियों और मदद को अनुभव करना 

किसी भी परिस्थिति में जब हम स्वयं को अकेला महसूस करते हैं और डरते हैं कि, इस परिस्थिति को हम कभी भी अकेले सॉल्व नहीं कर सकते, तो ऐसी परिस्थितियों के समय अनुभव करें कि, परमपिता परमात्मा आपके साथ हैं और आपको अपनी सुप्रीम हेल्प प्रोवाइड करा रहें हैं और आप उनकी  सुप्रीम शक्तियों को अब्जॉर्ब कर रहे हैं। इसके साथ ही परमपिता को अपना गाइड बनाते हुए, सारी परिस्थितियों को उनके ऊपर छोड़ दें, और उन्हें अपने तरीके से बेस्ट करने दें। इससे आप हमेशा और सदा के लिए निर्भय मुक्त फील करेंगे।

 

3.  परिस्थितियों में हल्के रहें और दबाव में आकर कमजोर न महसूस करें

जब आप किसी सिचुएशन से डरते हैं तो यह आपको डोमिनेट करना शुरू कर देती है और साथ साथ आपके विचारों को, शब्दों को और कर्मों को भी कमजोर बना सकती है, तो हमेशा याद रखें कि, आप एक स्पिरिचुअल पावर हैं और हमेशा दो शक्तिशाली प्वाइंट अपने मन में दोहराते रहें कि, मैं मास्टर वर्ल्ड ऑलमाइटी अथॉरिटी हूं परमपिता परमात्मा की संतान हूं और सारी मुश्किलों को नष्ट करने वाला हूं। ऐसे संकल्प परिस्थितियों में पॉजिटिविटी लाकर, उन्हें पॉजिटिव बना देते हैं और हमारे लिए लाभकारी भी।

 

4. अपने अंदर झांकें और अपनी विजय निश्चित करें

जब हमें विजुवलाइज करना शुरू कर देते हैं कि, हमने परिस्थितियों के ऊपर विजय पाना सीख लिया है और अपने मन में कोई शंका भी नहीं रखते हैं तो निर्भयता आती है। तो जितना अधिक हम इस प्रैक्टिस को अनुभव करते हैं, उतना ही हम सिचुएशंस के ऊपर विजय पाते जाते हैं और धीरे-धीरे हम शक्तिशाली और रिजिलिएंट होकर चिंतामुक्त बन जाते हैं।

 

5. हमेशा स्वयं से कहें कि, डर हमारे लिए अच्छा नहीं है

हमेशा स्वयं से कहें कि, डर एक नेगेटिव एनर्जी है और यह हमारे मन के लिए, हमारी वेल बीइंग के लिए, हमारी फिजिकल हेल्थ के लिए, हमारे रिश्तो के लिए और जो भी हम कर्म करते हैं, उन सबके लिए अच्छा नहीं है। तो जितना हम समझ पाएंगे कि, डरना माना एक गलत रास्ता लेना और यह परिस्थिति को और भी खराब करेगा, तो हम उसे अपनी अवेयरनेस में नहीं आने देंगे।

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