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अच्छे इरादों के साथ अच्छे कर्म करें

April 7, 2024

अच्छे इरादों के साथ अच्छे कर्म करें

कर्म हमारे द्वारा पैदा किए गए विचारों, शब्दों और कार्यों की एनर्जी का ही नाम है। जब हम स्वयं को इवेलुएट करते हैं तो पाते हैं कि, ऐसा हम “वर्ड्स और एक्शन्स” के स्तर पर आसानी से कर लेते हैं। हम इस बात का तो ध्यान रखते हैं कि, हम सही तरह से सही शब्दों का इस्तेमाल करके अच्छे से व्यवहार कर रहे हैं या नहीं; परन्तु अपने थॉट्स की चेकिंग नहीं करते कि वे सही हैं या नहीं? हममें से कई लोगों ने तो नेगेटिव ढंग से सोचने और महसूस करने में महारत हासिल कर ली है, लेकिन दूसरों के सामने हम मीठा बोलने का व्यवहार ही शो करते हैं। हम हमेशा से यही सोचते आए हैं कि लोग हमारी सोच को नहीं देख पाते हैं। उदाहरण के लिए– अगर हम किसी से ये कह रहे हैं कि, उनसे मिलकर हमें बहुत अच्छा लगा जबकि हमारे मन में फीलिंग है कि, ये हमारी सबसे बोरिंग शाम थी। या फिर घर आए अपने मेहमानों को डिनर पर रुकने के लिए इन्सिस्ट करते हैं लेकिन असल में उनके जाने का इन्तेज़ार कर रहे होते हैं। हमें ये लगता है कि, हमारे अच्छे बोल और व्यवहार से अच्छे कर्म हो रहे हैं। हम हर मिनट में लगभग 25 से 30 थॉट्स क्रिएट करते हैं और लगभग 4 से 5 लाइंस बोलते हैं। ऐसे में जब हम एनर्जी फ्लो को देखते हैं, तो हम पाएंगे कि हमने थॉट एनर्जी के रूप में 25 नेगेटिव तीर और शब्दों की एनर्जी के रूप में 5 पॉजिटिव तीर रूपी वायब्रेशन सामने वाले को भेजे हैं। हमारे कर्म; हमारे विचार, शब्द और कार्य के पीछे के हमारे इंटेंशंस होते हैं। हो सकता है कि, लोग मीठे शब्दों का प्रयोग तो कर रहे हों, फिर भी अपनी नेगेटिव एनर्जी से वे दूसरों को हर्ट करते हैं। वहीं दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं; जो भले ही अच्छे शब्द नहीं बोल रहे हैं पर फिर भी उनकी एनर्जी और इंटेंशन प्यार और दया से भरी हुई होती है। दूसरे लोगों के साथ; हमारे संबंध और कार्मिक अकाउंट इस बात पर निर्भर करता है कि, हम उनके बारे में कैसा सोचते और महसूस करते हैं।

 

आइए ये चेक करें कि, क्या जो हमारे मन में चलता है, वैसा ही हम बोलते हैं? अपने नेगेटिव थॉट को परफेक्ट शब्दों में बदलने की जगह, सबसे पहले नेगेटिव थॉट को परफेक्ट थॉट में बदलें और फिर वैसा ही बोलें। ऐसा करने पर ही हमारे विचारों, शब्दों और कार्यों से एक जैसा ही मैसेज पहुंचेगा और तीनों में तालमेल रहेगा। चाहे जो भी कार्य हो; जैसे कि; किसी को गिफ्ट देना, किसी की मदद करना, दान देना, दूसरों की प्रशंसा करना; इन सबके पीछे पहले अपनी इंटेंशन को चेक करें। अगर हमारी इच्छा दूसरों को प्रसन्न करने की, प्रशंसा और नाम, मान, शान पाने की है, तो ये शुद्ध कर्म के पीछे एक अशुद्ध इच्छा है।

 

इसलिए, अपने थॉट और फीलिंग्स को क्लीन करें, ताकि हमारे शब्दों से पहले हमारी परफेक्ट एनर्जी दूसरों तक पहुंचे।

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