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डेली लाइफ में टाइम मैनेजमेंट (भाग 1)

February 7, 2024

डेली लाइफ में टाइम मैनेजमेंट (भाग 1)

कभी-कभी कुछ लोगों के लिए अपने वर्क प्रेशर को हैंडल करना, डेड लाइंस को पूरा करना और संबंधों के चैलेंज को हैंडल करना काफी तनाव भरा हो सकता है। अब ऐसे में ये प्रश्न उठता है कि, हम किस प्रकार खुद को तनाव मुक्त रखते हुए अपनी कार्य क्षमता को भी बनाए रखें? इसके लिए जरूरी है कि, जब भी हम कुछ नया काम शुरू करने जा रहे हों, कुछ महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें।

उदहारण के लिए; यदि हम ऑफिस में प्रोजेक्ट लीडर के पद पर कार्यरत हैं, तो हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि, ऑफिस के सभी कार्यों के साथ-साथ, दूसरे सभी पहलुओं पर भी हम पूरा-पूरा ध्यान दें और इस प्रोसेस में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है हमारा टाइम मैनेजमेंट; जिसका मतलब है कि हम अच्छे से समझते हैं कि, किस प्रकार निर्धारित समय सीमा के अंदर प्रोजेक्ट के सभी पहलुओं को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है? और जब हम इस तरह से टाइम की प्लानिंग करते हैं तो इसका सबसे महत्त्वपूर्ण पार्ट है; कम से कम थॉट्स क्रिएट करना। ऐसा इसलिए, क्योंकि जितने ज्यादा थॉट्स हमारे मन में होंगे, हमें कार्य पूरा करने में उतना ही अधिक समय लगेगा। और हम अपने अनुभव से यह कह सकते हैं कि; कुछ साधारण टेक्नीक जैसेकि “मेडिटेशन” के द्वारा अपने मन को शांत करने से हमारी कार्य क्षमता बढ़ जाती है और कम समय में ज्यादा से ज्यादा कार्य कर सकते हैं। अपने मन को शांत करने का एक बहुत ही साधारण तरीका है- ट्रैफिक कंट्रोल;   जिसमें हर घंटे में हम अपने कार्य को एक छोटा सा पॉज देते हैं। इसमें हम इंपॉर्टेंट क्वॉलिटी के कुछ पॉजिटिव थॉट्स; शांति, प्रेम, खुशी, सफलता, विजय और विश्वास क्रिएट करते हैं। ऐसा हम एक मिनट के लिए कर सकते हैं और फिर से अपना कार्य शुरू कर सकते हैं। इस तरह से हम फोकस्ड रहेंगे और अगले एक घंटे के लिए हमरा मन चार्ज हो जाएगा। ये हमारे मन और शरीर के बीच कम्युनिकेशन का एक सिद्धांत है कि, जितना अधिक हम अपने मन को शांत रखते हैं, उतना ही अधिक हम अपने शरीर द्वारा कार्य को सही तरह से कर पाते हैं।

(कल जारी रहेगा)

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