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गणेश चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व (भाग 2)

September 20, 2023

गणेश चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व (भाग 2)

कल हमने श्री गणेश जी के जन्म का सही अर्थ जाना कि, कैसे शंकर जी ने उनका सिर काटकर उनके धड़ पर हाथी का सिर लगा दिया, जो इस बात का प्रतीक है कि, परमपिता हमारे अहंकार के सिर को समाप्त कर उसके स्थान पर ज्ञान के सिर को लगाते हैं। तो आईए, आज के संदेश में उनके शारीरिक स्वरूप के रियल अर्थ को समझें:

  1. श्रीगणेश जी का बड़ा मस्तक विशाल बुद्धि का प्रतीक है। इसलिए जब हम परमपिता द्वारा दिए गए आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन करते हैं और इसे अपने हर विचार, शब्द और कार्य में समझ के साथ एप्लाई करते हैं, तो हम विवेकशील हो जाते हैं।
  2. सूप/ छलनी जैसे चौड़े कानों का मतलब है कि, हम केवल किसी व्यक्ति वा परिस्थिति में सिर्फ अच्छाई को ही ग्रहण या आत्मसात करते हैं और शुद्ध जानकारी ग्रहण करने से हमारा मन सदा स्वच्छ रहता है।
  3. उनकी छोटी आंखें दूरदर्शिता का प्रतीक हैं, जिसका अर्थ है कि, कर्म करने से पहले उसके भविष्य में होने वाले परिणाम देखने के बाद ही कर्म करें।
  4. उनका छोटा मुख हमें यह याद दिलाता है कि, हम कम बोलें और हमारे द्वारा बोले गए हर शब्द दूसरों के लिए आशीर्वाद बने।
  5. उनके विशाल पेट के समान; तना (ट्रंक) इतना शक्तिशाली होता है कि, पेड़ों को उखाड़ सकता है और साथ ही उतना ही मुलायम होता है कि, एक बच्चे को उठा सकता है। इसका मतलब है कि, हमें भावनात्मक रूप से नरम और मजबूत होने की जरूरत है। हमें अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए; लव और लॉ का संतुलन बनाए रखना होगा।
  6. श्रीगणेश को एक ही दाँत के साथ दिखाया जाता है जोकि यह दर्शाता है कि, हमें पसंद-नापसंद, सुख-दुख, सुखद-अप्रिय, अच्छे-बुरे के द्वंद्व में नहीं फंसना चाहिए। हमें इन सभी पर काबू पाना होगा और हमेशा संतुष्टता का भाव रख संतोष सभी परिस्थितियों में शांतिपूर्ण रहना होगा।

(कल भी जारी रहेगा…)

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