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कर्म करते हुए आत्मिक स्थिति में रहने का अभ्यास (पार्ट 3)

March 17, 2024

कर्म करते हुए आत्मिक स्थिति में रहने का अभ्यास (पार्ट 3)

कई बार कर्म करते समय हम उसमें इतना खो जाते हैं, भूल जाते हैँ कि, ये सारे कर्म हमारी आन्तरिक शक्ति या आत्मा ही करती हैl हमारे हाथ काम करते हुए दिखाई देते हैं, शब्द बोलते हुए हमारा मुख दिखाई देता है और जो भी कुछ हम देखते हैं व सुनते हैं, वो सब हमारी आँख तथा कान द्वारा दिखाई या सुनाई देते हैंl लेकिन हमेशा अपने कर्मों में संतुलन बनाए रखने के लिए यह याद रखना जरूरी है कि, हमें एक ऐसी सकारात्मक, शक्तिशाली और डिटैच्ड मन: स्थिति; जो जल्दी डिस्टर्ब न हो, के लिए यह याद रखना जरूरी है कि हमारे सभी अंग हाथ, मुख, आँखें और कान आदि आत्मा यानि रियल सेल्फ द्वारा कंट्रोल होता हैl मैं कोई मिस्टर X या मिस्टर Y नहीं हूँl बल्कि ये नाम मेरे स्थूल शरीर अथवा शरीर रूपी वस्त्र के हैंl मेरी सत्य पहचान है; मैं इन आंखों से दिखाई न देने वाली सूक्ष्म शक्ति व आध्यात्मिक सत्ता – आत्मा हूँ l

 

इस तरह से आत्मिक स्थिति में रहने से; हम अपने सभी कर्म और शब्दों को दूर से देख पाते हैं, उसमें बहुत अधिक इंवॉल्व होने की चिंता किए बिनाl हमारे जीवन में चीज़ें कई बार गलत हो सकती हैंl हमारा काम गलत दिशा में आगे बढ़ सकता है, लोगों का नजरिया हमारे लिए नकारात्मक हो सकता है और हमारा शरीर भी अस्वस्थ्य हो सकता हैl साथ ही, कई बार हमें बहुत सारे कार्य; एक साथ और सही समय पर करने होंगेl ऐसा सब कुछ समय-समय पर होता रहेगाl और कई बार ऐसे दिन भी होंगे जब हमें बहुत कुछ करना होगाl लेकिन अगर हम अपनी आत्मिक स्थिति में रहें या अपने आध्यात्मिक गुणों और शक्तियों के एहसास के साथ अपनी अंतरात्मा के संपर्क में रहें, तो हम ऐसे समय पर शांत और नियंत्रित रह पाएंगेl इसलिए, खूब मेहनत करें, अपने रिश्तों को खूबसूरत बनाएं; जो प्यार और खुशी से भरपूर हों तथा जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करेंl लेकिन इसके साथ ही अंतर्मुखी और बंधनमुक्त रहने का संतुलन बनाना भी न भूलेंl यह हमारे लिए “शांति व आत्मसम्मान” से भरपूर “संतुष्ट और तनाव मुक्त” जीवन शैली की चाभी है l

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