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क्या क्रोध को दबाना ठीक है? या फिर इसे पैदा ही न होने दें!!

October 19, 2023

क्या क्रोध को दबाना ठीक है? या फिर इसे पैदा ही न होने दें!!

क्रोध करना हमारा मूल स्वभाव नहीं है लेकिन जब परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल नहीं होतीं, तो बार-बार क्रोधित होकर हम इसे अपना नॉर्मल रिएक्शन बना लेते हैं। हम या तो इसे एक्सप्रेस करते हैं, नकारते हैं या फिर ज्यादा से ज्यादा इसे दबा देते हैं। हमारा गुस्सा भले ही कितना पुराना या क्रोनिक हो चुका हो, लेकिन अच्छी खबर यह है कि, हम पहले इसे कंट्रोल करने और फिर खत्म करने के लिए नीचे बताए गए पॉइंट्स को अपना सकते हैं।

क्या धैर्यता और शांति की तरह क्रोध करना भी हमारी चॉइस है?

आप अपने सीनियर्स वा बड़े अधिकारियों पर गुस्सा न करने का विकल्प चुनते हैं जबकि, दूसरी तरफ आप खुद को दूसरों पर गुस्सा करने की आजादी देते हैं या चुनते हैं। इसके लिए जरूरी है कि, पेशेंट रहने के लिए हर दिन सुबह मेडिटेशन का अभ्यास करें।

क्या रिएक्ट करना उचित है:

शुरुआत में आपको रिएक्ट करने की इच्छा हो सकती है, लेकिन अपना गुस्सा जाहिर न करें। क्योंकि जब आप किसी पर गुस्सा करते हैं तो दूसरा व्यक्ति भी उसी तरह रिएक्ट करता है  और फिर आप पुनः और जोर से रिएक्ट करते हैं और दूसरा व्यक्ति भी ऐसा ही करता जाता है। इस तरह से क्रोध की तीव्रता कई गुना बढ़ जाती है।

अपने स्वमान में रहें:

स्वयं को याद दिलाएं कि – मैं एक शक्तिशाली आत्मा हूं। मैं दूसरों के रिएक्ट करने पर यह सोचता हूं कि, वे जो करते हैं, उसके पीछे जरूर कोई कारण होगा, परंतु मैं अपनी स्वयं की सुरक्षा और उन्हें सशक्त बनाने के लिए; उनके साथ धैर्यता और स्वीकृति का गुण उपयोग करता हूंहम इसे गुस्से को दबाना नहीं कहेंगे, बल्कि जब आप बाहर से गुस्सा होना कम या खत्म करते हैं तो धीरे-धीरे अंदर भी यह कम या खत्म होता जाता है।

स्वीकार्यता का गुण धारण करें:

आज के दिन में; किसी के व्यवहार को एक्सेप्ट (स्वीकार) करें, समझ और शांति के वाईब्रेशन के साथ; उन्हें बेहतर बनने का मौका दें। स्वयं पर ध्यान दें कि, आपकी आंतरिक स्थिरता (इनर स्टेबिलिटी) कैसे उनको और आपको लाभ पहुँचाती है। फिर जब एक बार आप किसी एक व्यक्ति के साथ धैर्यता का गुण अपना सकते हैं, तो आने वाले दिनों में इसे और 2 लोगों के साथ दोहराएं।

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