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परमात्मा के ट्रस्टी कैसे बनें? (भाग 3)

December 13, 2023

परमात्मा के ट्रस्टी कैसे बनें? (भाग 3)

इस फिजिकल दुनिया में ट्रस्टी शब्द का एक बहुत ही सामान्य उदाहरण है कि – जब भी किसी ऐसे अमीर व्यक्ति की मृत्यु होती है, जिसके पास अपना कोई उत्तराधिकारी नहीं होता है तो वो अपनी इच्छा अनुसार ये सुनिश्चित करने के लिए कि, उसकी संपत्ति का सद्‌उपयोग हो, उसे किसी एक ट्रस्टी या ट्रस्टियों के समूह को सौंप देता है। एक दूसरा उदाहरण – मंदिरों और वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन्स के ट्रस्टियों का भी है। परमात्मा के प्रति अपनी आस्था, प्रेम और भक्ति में जो भी संपत्ति और आभूषण मंदिरों में चढ़ाए जाते हैं और लोगों द्वारा अपनी संपत्ति जो भी वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन्स को दान में दी जाती हैं, उन सबकी देखभाल भी ट्रस्टियों के एक समूह द्वारा होती है। इन सभी मामलों में यह पाया गया है कि एक ईमानदार ट्रस्टी उस संपत्ति को निर्देशानुसार संभालते हुए यह ध्यान रखता है कि, यह धन या संपत्ति उसका नहीं है। और धन संपत्ति के  असली मालिक के विश्वास को बनाए रखने वाले व्यक्ति को ट्रस्टी कहा जाता है।

ठीक इसी प्रकार प्रतिदिन अपनी दिनचर्या में हमें भी यह ध्यान रखना चाहिए कि, मेरा मन, वाणी, कर्म, गुण, शक्तियाँ, समय, स्थूल धन आदि का खज़ाना परमात्मा की प्रापर्टी हैं। इनकी देखभाल करने के लिए मुझे यहां नियुक्त किया गया है और मुझे बस ट्रस्टी बन इनकी देखभाल करनी है। ऐसा करने पर हम परमात्मा की इच्छा व उनके निर्देश अनुसार सभी खज़ानों की देखभाल सकारात्मक तरीके से करके, स्वयं के साथ दूसरों को भी ट्रस्टी होना क्या है; इस सत्यता के करीब लाते हैं। इससे हम इन खजानों से डिटेच्ड रह पाते हैं और इसका फायदा हमें जीवन में हर कदम पर होता है।

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