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प्रशंसा और आलोचना में स्टेबल कैसे रहें

December 10, 2023

प्रशंसा और आलोचना में स्टेबल कैसे रहें

हम सभी को यह चेक करने की आवश्यकता है कि, यदि प्रशंसा हमारे अहंकार को बढ़ावा देती है, तो आलोचना होने पर हम निश्चित रूप से परेशान हो जायेंगे। इसलिए आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन हमें प्रशंसा या आलोचना; इन दोनों बातों से बिना प्रभावित हुए, अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित करना सिखाता है।

  1. किसी भी तरह के फीडबैक दिए जाने पर अपने पहले रिएक्शन को चेक करें: कि क्या आप प्रशंसा से मोहित हो जाते हैं? और जब आपकी आलोचना की जाती है तो क्या आप अपना बचाव करते हैं या कोई प्रतिक्रिया देते हैं? यदि हां, तो अगली बार ऐसी सिचुएशन में स्टेबल रहने के लिए कुछ पल के लिए पॉज लेने का अभ्यास करें।
  2. स्वयं को परमात्मा का एक इंस्ट्रूमेंट की अवेयरनेस में रहकर विनम्र बने रहें और कर्म करते हुए भावनात्मक रूप से अलग होते हुए भी उसमें शामिल रहें। हर किसी की राय अलग-अलग होती है, यह समझकर और मानकर अपने कार्यक्षेत्र में जाएं।
  3. प्रशंसा से अछूते रहने का अभ्यास करें। प्रशंसा आख़िरकार उनकी धारणा, उनके शुद्ध इरादे और उनकी उदारता का प्रतिबिंब है। प्रशंसा करने वाले व्यक्ति को धन्यवाद दें, और उसे परमात्मा को सौंप दें और सकारात्मक कार्य में स्वयं को एक इंस्ट्रूमेंट वा साधन के रूप में यूज़ किए जाने के लिए आभारी रहें।
  4. सराहना या प्रशंसा में स्थिर रहने से आप आलोचना को भी गरिमा के साथ संभाल सकेंगे। आलोचना करने वाला व्यक्ति अपनी धारणा, मनोदशा और व्यक्तित्व के अनुसार ऐसा करता है। इसलिए इससे जुड़ी भावनात्मक ऊर्जा से अलग हो जाएं, और साथ ही दिए गए फीडबैक को एनालाइज करें और देखें कि, कहीं  कुछ बदलाव लाने की जरूरत है? अन्यथा इसे पूरी तरह से नजरअंदाज करें, जाने दें और स्थिर रहें। ऐसी सिचुएशन में अपना और उनका सम्मान करें।

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