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सम्पूर्ण फरिश्ता बनने के पाँच सरल कदम (पार्ट-2)

March 2, 2024

सम्पूर्ण फरिश्ता बनने के पाँच सरल कदम (पार्ट-2)

कल के आगे का संदेश:

 

  1. सदा याद रखें कि, परमात्मा की नजरें आपके ऊपर हैं- संपूर्ण बनने की शुरुआत करने का दूसरा इंपोर्टेंट स्टेप है; यह जानना और याद रखना कि, हम आत्माओं के आध्यात्मिक माता-पिता अर्थात् परमात्मा की दृष्टि सदा हम बच्चों के ऊपर है। वे हमेशा आशा करते हैं कि, हम बच्चे; उनके दिव्य गुणों को अपने जीवन में धारण करें। ठीक वैसे ही, जैसे हमारे शरीर के माता-पिता हम बच्चों से आश रखते हैं। लेकिन, यहां पर केवल शारीरिक सुंदरता की बात नहीं है बल्कि हमें अपनी आत्मा को दिव्य और अलौकिक बनाना है। साथ ही, यह स्मृति भी रहनी चाहिए कि, परमात्मा हमें एक शिक्षक के रूप में भी देख रहे हैं और वे आशा करते हैं कि, हम अलग-अलग तरीकों द्वारा एक्सीलेंस प्राप्त करें, एक सशक्त व्यक्ति के रूप में दूसरों को सम्मान दें और सम्मान पाएं, दूसरों को संतुष्ट करें और स्वयं भी संतुष्ट रहें, और जीवन के हर क्षेत्र में अच्छाई प्रसारित करते रहें। तीसरा, परमात्मा हमें एक गाइड या गुरु के रूप में भी सदा देखते हुए; जीवन जीने के सही तरीके अपनाकर, आदर्श उदाहरण बनाना चाहते हैं जिससे हमारी जीवन शैली दूसरों के लिए प्रेरणादायक हो।  इसके अलावा, परमात्मा हमारे सबसे प्यारे खुदा दोस्त भी हैं और वह चाहते हैं कि, हम उनका हाथ पकड़कर पूरी दुनिया को दिखाएं कि, आज समय की मांग के अनुसार सच्चा परमात्म साथ कितना जरूरी है। इन सब स्टेप्स को अपने जीवन में शामिल करने से; हमारा फिजिकल शरीर, धन दौलत, संबंध-संपर्क और परिस्थितियों के समय भी हमें हल्केपन और आनंद की अनुभूति होती रहेगी।

 

  1. स्वयं को स्मृति दिलाएं कि, आप विश्व नाटक मंच पर हैं– हम सभी वर्ल्ड एक्टर हैं और इस विश्व नाटक मंच पर अपना श्रेष्ठ पार्ट बजा रहे हैं और हमारे द्वारा किया गया हर कर्म इस संसार के लोगों की नज़रों में है। इसलिए, सदा यह स्मृति रखें कि, आपका हर एक थॉट और इमोशन; आपके आस-पास के लोगों द्वारा लगातार अनुभव किया जा रहा है। यह ऐसा ही है, जैसे मानो आप एक स्टेज शो में रहते हुए वह सब कुछ अनुभव करते हैं, जो दूसरे करते हैं, उसी प्रकार से दूसरे भी वैसा ही अनुभव कर रहे हैं। जब हम इस एक्टर की अवेयरनेस में रहकर, अपने हर कार्य को अधिक रिस्पेक्ट और रिस्पॉन्सिबिलिटी के साथ करेंगे, आत्मिक स्मृति में रहकर अन्य लोगों के सम्मुख स्वयं को प्रस्तुत करेंगे, तब हम कुछ भी गलत नहीं होने देंगे। और जैसे गायन है- कि जैसा कर्म हम करेंगे, हमें देखकर दूसरे भी वही करेंगे, यह हमारे जीवन की पॉजिटिव रिएलिटी बन जाएगा।

(कल भी जारी रहेगा)

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