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जिंदगी की दौड़ में ना भागें…. प्रेजेंट मोमेंट को एंजॉय करें (भाग 2)

June 18, 2024

जिंदगी की दौड़ में ना भागें….प्रेजेंट मोमेंट को एंजॉय करें (भाग 2)

ख़ुशी और सफलता वास्तव में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं या यूं कहें कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं; जिन्हें पर्सु यानि कि उनका पीछा नहीं किया जा सकता। यदि हम अपने जीवन में सोल कांशियसनेस यानि आत्मिक चेतना का अभ्यास करते हैं, तो यह विचार क्रिएट होता है कि सफलता और खुशी ये दोनों इमोशंस प्राप्त करने के लिए हमें अपने फिजिकल सेल्फ से ऊपर उठना होगा, जिसके परिणाम स्वरूप हमें ये दोनों इमोशंस अनुभव होंगे। इस जीवन में हम जिन परिस्थितियों का सामना करते हैं, जो हमारे पिछले कर्मों के अनुसार घटित होती हैं, अक्सर हमारी चाहना या इच्छा से अलग होती हैं। और मनुष्य के असंतोष की जड़ें इस तथ्य में निहित हैं कि, परिस्थितियाँ अक्सर स्वाभाविक रूप से खुद ही घटित होती हैं नाक़ी हमारी इच्छाओं के अनुसार। ये सिचुएशन हमारे लक्ष्यों के विपरीत अचानक से और अलग तरीके से क्रिएट हो जाती हैं। हालाँकि, ऐसी परिस्थितियों में, यह अवेयरनेस महत्वपूर्ण है कि हमारे पास ऐसी अप्रत्याशित या अचानक आने वाली परिस्थितियों के अंदर से भी कुछ अच्छा करने का ऑप्शन होता है, जो हर पल हमारे मन की खुशी और संतुष्टता से भरपूर आंतरिक दुनिया का निर्माण करने में मदद कर सकता है। इसलिए, यह हमारी अपनी अवेयरनेस द्वारा चीज़ों को नियंत्रित करके, खुशी प्राप्त करने का एक विकल्प है।

 

आज की मॉडर्न दुनिया में धन, स्टेटस और हमारी भूमिकाएं खुशी के महत्वपूर्ण सिंबल बन गए हैं। वे वास्तविक रूप से दुआओं से भरपूर और महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब वे हमें खुशी महसूस करने में मदद करते हैं। इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि हम इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, कैसे कॉन्शियसली प्रयास कर सकते हैं, और साथ ही इन पलों में खुश और संतुष्ट भी रह सकते हैं। भौतिकवादी सफलता जीवन का केवल एक पहलू है। जीवन के और भी कई आयाम हैं जो हमें आनंद और संतुष्टि दे सकते हैं। साथ ही, यह अवेयरनेस हमें दूसरों की अटेंशन और अप्रूवल के आदी होने से मुक्त कर सकती है जो अक्सर भौतिकवादी स्तर पर सफल होने के साथ आती है। आज के आधुनिक जीवन के तनाव से उबरने के लिए, सबसे पहले हमें खुशी के अपने मूल गुण को फिर से अनुभव करने की आवश्यकता है। हम यह डिफाइन कर सकते हैं कि वास्तव में हमारे लिए क्या महत्वपूर्ण है और क्या नहीं। तब हम अपने काम में एंजॉयमेंट पाने के साथ अपने लक्ष्य को भी अचीव कर सकते हैं, और इसके सामाजिक महत्व और बाहरी परिस्थितियों की परवाह किए बिना खुद को पुरस्कृत करना भी सीख सकते हैं।

(कल भी जारी रहेगा…)

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