आत्मा के 5 प्रकार के संस्कार

आत्मा की 3 शक्तियाँ होती हैं – मन, बुद्धि और संस्कार। अक्सर हम कहते हैं कि हम एक-दूसरे को समझ नहीं पाते, और कभी-कभी अपने ही व्यवहार को भी नहीं समझ पाते। इसका कारण यह है कि हमें यह पता नहीं होता कि हर आत्मा अपने साथ कौन-कौन से संस्कार लेकर चल रही है। हर आत्मा के पास 5 प्रकार के संस्कार होते हैं:
1. परिवार से मिलने वाले संस्कार – हम अक्सर देखते हैं कि हमारी कुछ आदतें हमारे माता-पिता या परिवार के सदस्यों जैसी होती हैं। ये आदतें शारीरिक भी हो सकती हैं और सोचने का तरीका या स्वभाव भी।
2. अपने आस पास के वातावरण से बनने वाले संस्कार – देश, जाति, संस्कृति, शहर, मोहल्ला, स्कूल, मित्र और हमारा सामाजिक वातावरण हमारे अंदर अलग-अलग प्रकार के संस्कार बना देता है।
3. पिछले जन्म से लाए हुए संस्कार – हम यह समझते हैं कि हम यह शरीर नहीं, बल्कि आत्मा हैं। आत्मा एक ऐसी शक्ति है जो न बनती है, न नष्ट होती है, वह अमर और अविनाशी है। मृत्यु का अर्थ है आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है। जब आत्मा एक शरीर छोड़ती है, तो अपने संस्कार साथ ले जाती है। इसलिए एक जैसे दिखने वाले जुड़वाँ बच्चों का स्वभाव भी अलग-अलग होता है, क्योंकि शरीर समान है पर आत्मा का पिछला संस्कार अलग है।
4. अपनी संकल्प-शक्ति से बनाए हुए संस्कार – हम चाहे जैसे भी संस्कार लेकर आए हों, परिवार या वातावरण से जो भी मिला हो, लेकिन अगर हम बदलना चाहें तो अपनी इच्छाशक्ति से नए संस्कार बना सकते हैं।
5. आत्मा के मूल संस्कार – ऊपर के चार प्रकार के संस्कार शरीर का उपयोग करते हुए बने हैं, लेकिन हर आत्मा के अपने मूल संस्कार होते हैं — शांति, सुख, प्रेम, आनंद, पवित्रता, शक्ति और ज्ञान। जबकि क्रोध, अहंकार, लोभ, ईर्ष्या, भय आदि संस्कार वास्तविक नहीं हैं, ये बाद में बने हुए संस्कार हैं। जब हम आत्म-चेतना में रहते हैं और अपने मूल संस्कारों को याद करते हैं, तो वे फिर से प्रकट होने लगते हैं।
आइए याद रखें मैं कौन हूँ — मैं एक पवित्र, शांत और प्रेमस्वरूप आत्मा हूँ, और आज जिनसे भी मिलूँगा, वे भी ऐसी ही आत्माएँ हैं।
आज का अभ्यास
आज अपने को देखे कि, मेरी प्रतिक्रियाएं परिवार, वातावरण या पुराने संस्कारों से तो नहीं आ रही हैं? और, सजग होकर अपनी मौलिक शांति, प्रेम और आंतरिक शक्ति को चुनूं।
किसे भेजें यह संदेश?किसी को आज इसकी जरूरत है
रोज़ ज्ञान पाएंWhatsApp पर



