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मतभेद के कारण लोगों से दूर न हों

मतभेद के कारण लोगों से दूर न हों
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आज रिश्तों के नाजुक होने का एक बड़ा कारण है कि, जिन लोगों के साथ हम रहना चाहते हैं उनके लिए हम ज़्यादा सेलेक्टिव होते जा रहे हैं। यदि हमें किसी का व्यवहार असहज महसूस होता है, तो हम एडजस्ट करने या उनकी मदद करने के बजाय उनसे दूर होने या पीछे हटने लगते हैं और हमारी ये आदत हमारे प्यार, उनके साथ शेरिंग और केयरिंग को रोकती है। हम सभी जानते हैं कि कुछ समय पहले की ही बात है जब हमारे यहां जॉइंट फैमिली का कल्चर था, जहां तीन से चार पीढ़ियों के 20-25 लोग एक साथ, एक ही छत के नीचे रहते थे। और जब भी हमारे स्वभाव, संस्कार या आदतों में डिफरेंसेज होते थे, तो हम खुद को ढालते थे। लेकिन आज आपस में छोटे-छोटे डिफरेंसेज के चलते, हम पीछे हटने लगे हैं या लोगों को अवॉइड करने लगे हैं। आइए इसी से जुड़ी कुछ बातों को जानें:

1. प्रतिदिन मेडिटेशन का अभ्यास और आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन करने से हम खुद को सशक्त बनाते हैं और हमारा आत्म-सम्मान भी बढ़ता है। ऐसा करने से, दूसरों को स्वीकार करना और अलग-अलग व्यक्तित्व के लोगों के साथ एडजस्ट करना आसान हो जाता है।

2. जब किसी का व्यवहार हमें असहज लगता है, तो ये आवश्यक है कि, हम उनके स्वभाव और उसके पीछे के दर्द को समझने की कोशिश करें। लोग जानबूझकर आपको चोट पहुंचाने या फिर हेर-फेर नहीं करना चाहते हैं, बल्कि वे खुद अपनी आदतों, मान्यताओं और बिलीफ सिस्टम का शिकार होते हैं। ऐसे में, हमारी समझ ही उनके प्रति सहानुभूति को दर्शाती है।

3. जब आप किसी बात से हर्ट हो जाएं, ऐसे में अपने मन को सलाह दें कि, ये उनका स्वभाव है। जो मेरे लिए स्वाभाविक है, वो उनके लिए मुश्किल हो सकता है। मैं अतीत को भुलाकर आगे बढ़ता हूँ, अपने और उनके रिलेशन को हील करता हूँ। ये उनके प्रति हमारा करुणाभाव दर्शाता है।

4. सहानुभूति और करुणा के साथ आप उनके प्रति प्योर थोट क्रिएट करते हैं। जिसके कारण पीछे हटने का कोई भी मार्जिन नहीं रहता और आप उन्हें स्वीकार करने और उनके साथ रहने का अपना हर संभव प्रयास करते हैं।

आज का अभ्यास

मतभेद होने पर लोगों से दूर न होकर समझ, सहानुभूति और मेडिटेशन से रिश्तों को कैसे सशक्त और स्थिर बनाया जाए, यह लेख सिखाता है।

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