विश्व को पावन बनाने की परमात्म शक्ति (भाग 1)

हम लगभग 8 अरब मनुष्यों और असंख्य जानवरों, पक्षियों तथा अन्य जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियों के साथ इस दुनिया में रह रहे हैं। इसके अलावा, दुनिया भौतिक प्रकृति से बनी है जिसमें पाँच तत्व शामिल हैं - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष। जैसा कि परमात्मा ने बताया है कि वर्ल्ड ड्रामा का यह नियम है कि परमात्मा के साथ-साथ, मनुष्य सहित दुनिया की सभी प्रजातियों की सभी आत्माएं और उनका फिजिकल नेचर शाश्वत है और इन तीनों से जुड़ा 5000 वर्षों का यह वर्ल्ड ड्रामा इस पृथ्वी ग्रह पर बार-बार दोहराया जाता है। इस वर्ल्ड ड्रामा में सभी आत्माओं की, अलग-अलग जन्मों में भूमिकाएँ निश्चित हैं। वे इन भूमिकाओं को बार-बार निभाते हैं क्योंकि यह वर्ल्ड ड्रामा निरंतर स्वयं को दोहराता है। इस वर्ल्ड ड्रामा के आदि यानि कि शुरुआत में सभी आत्मायें पवित्र हैं। वे जन्म और पुनर्जन्म की इस यात्रा में पार्ट बजाते बजाते पहले पवित्र से अपवित्र बनती हैं और फिर वर्ल्ड ड्रामा के अंत में परमात्मा की मदद द्वारा अपवित्र से पवित्र बनती हैं।
इस विश्व नाटक में सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली ऊर्जा सर्वोच्च परमात्मा की है। उसके बाद मनुष्य आत्माओं की आध्यात्मिक ऊर्जा आती है, जो दूसरी सबसे प्रभावशाली शक्ति है। इसके बाद संसार में रहने वाली विभिन्न प्रजातियों के अन्य जीवों की आत्माओं की ऊर्जा आती है। यदि इसे समझें, तो यह एक प्रकार की पदानुक्रम (हायरार्की) जैसी व्यवस्था है—जिसमें सबसे ऊपर परमात्मा हैं, उनके नीचे मनुष्य आत्माएँ हैं, फिर उनके नीचे लाखों प्रजातियों के अन्य जीवों की आत्माएँ आती हैं। सबसे नीचे पाँच तत्वों की भौतिक प्रकृति है। इन तत्वों में पेड़-पौधे, भूमि, समुद्र, नदियाँ, पहाड़ आदि सब शामिल हैं, जिनमें आत्मा नहीं होती।
(कल जारी रहेगा…)
आज का अभ्यास
विश्व नाटक में परमात्मा की शक्ति सबसे श्रेष्ठ और प्रभावशाली है। उनकी सहायता से आत्माएँ अपवित्रता से पवित्रता की ओर लौटती हैं और दुनिया को फिर से शांति और पवित्रता से भर देती हैं।
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