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क्या आपने कभी सोचा है कि कर्म का सिद्धांत कैसे काम करता है? जानें कैसे आपके हर विचार और कर्म आपके जीवन की खुशियों या दुखों को आकर्षित करते हैं।
आज हम नकारात्मकता से लड़ने के बजाय उसे स्वीकार कर, अपनी सोच और कर्मों को सकारात्मक दिशा में परिवर्तित करने का संकल्प लें।
आज अभ्यास करें, मैं एक पवित्र आत्मा हूँ, और परमात्मा की याद से शक्तिशाली बन रही हूँ। आज हर परिस्थिति को, पुराने कर्म समाप्त करने और शांति फैलाने का अवसर माने।
विश्व नाटक के संगम युग में परमात्मा आत्माओं को आध्यात्मिक ज्ञान, योग और दिव्य गुणों के द्वारा पावन बनाते हैं। इसी प्रक्रिया से मनुष्य, प्रकृति और संसार फिर से शुद्ध होकर स्वर्ण युग की ओर बढ़ता है।
विश्व नाटक में परमात्मा की शक्ति सबसे श्रेष्ठ और प्रभावशाली है। उनकी सहायता से आत्माएँ अपवित्रता से पवित्रता की ओर लौटती हैं और दुनिया को फिर से शांति और पवित्रता से भर देती हैं।
परमात्मा कैसे साधारण मनुष्य को देवी देवता बनने की शिक्षा देते हैं। यह लेख पाँच योग्यताओं, दिव्य गुणों और संगमयुग में आत्मा की श्रेष्ठ अवस्था को सरल शब्दों में स्पष्ट करता है आज के जीवन हेतु
क्या आप परमात्मा से संबंध जोड़ना चाहते हैं। यह भाग आत्मा की पूर्ण यात्रा, नए विश्व के स्वप्न और परमात्मा के सान्निध्य का प्रत्यक्ष अनुभव करने की प्रेरणा देता है।
आत्मा की खोज अब कैसे पूरी होती है। इस भाग में परमात्मा स्वयं अपना परिचय देते हैं और बताते हैं कि कर्म, ज्ञान और योग से जीवन कैसे रूपांतरित होता है।
आत्मा की पवित्रता घटने के बाद क्या हुआ। इस भाग में परमात्मा की याद, धर्मगुरुओं का आगमन और भटकती मानवता की खोज को विश्व नाटक के क्रम में समझाया गया है।
वर्षों से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर इस लेख में छिपे हैं। महाशिवरात्रि के संदेश के साथ आत्मा की पहचान, स्वर्ग की शुरुआत और विश्व नाटक में आत्मा की भूमिका को समझें। यह श्रृंखला का पहला भाग है।
प्रेम और आनंद से आगे, क्रिसमस हमें आत्मा, परमात्मा और स्वर्ग समान नई दुनिया की याद दिलाता है; इस आध्यात्मिक सुंदरता को महसूस करें।