इक्कीस वर्षों तक शराब, सिगरेट और गुटका मेरे जीवन का हिस्सा बने रहे। परिवार और मित्रों के प्रभाव से शुरू हुई यह आदत धीरे-धीरे ऐसी लत बन गई, जिसने मेरे स्वास्थ्य और करियर दोनों को प्रभावित किया। मैं एक आईटी इंस्टीट्यूट का निदेशक था, लेकिन व्यसनों के कारण मुझे लीवर की बीमारी हो गई। मेरी मानसिक स्थिति लगातार नकारात्मक होती गई, व्यवसाय में भारी नुकसान हुआ और मैं अवसाद (डिप्रेशन) में चला गया। छह महीनों तक मैंने स्वयं को एक कमरे में बंद रखा। परिवार से झगड़े बढ़ने लगे, रिश्तों में दूरी आ गई और जीवन के प्रति निराशा गहराती चली गई।
जीवन में मोड़ तब आया, जब मेरी बहन ने मुझे राजयोग सीखने की प्रेरणा दी। सेवा केंद्र पर पहले ही दिन मैंने सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। नियमित अभ्यास के साथ मेरे व्यसन धीरे-धीरे छूटते गए और कुछ समय बाद पूरी तरह समाप्त हो गए। राजयोग ने मेरी निर्णय-शक्ति को सुदृढ़ किया, आत्मविश्वास लौटाया और जीवन को नई दिशा दी।
आज मैं नशामुक्त हूँ।




