
“जब कोई भी काम शुरू करने से पहले मन को शांत, सोल कॉन्शियस और सही कर्मों के लिए तैयार करना हो।”
इस गाइडेड मेडिटेशन का अनुभव करने के बाद मन को यह याद आता है कि हर कर्म सिर्फ काम पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि सुखदायी, सम्मानपूर्ण और एम्पावर करने वाला होना चाहिए। इससे सोच, बोल और कर्म में अटेंशन आती है और व्यक्ति अपने गुणों की खुशबू अपने कर्मों से फैलाने के लिए प्रेरित होता है।
यह मेडिटेशन वर्तमान कर्मों और भविष्य की तकदीर के बीच का गहरा संबंध महसूस कराती है। इससे सही करने की हिम्मत बढ़ती है, चाहे अकेला खड़ा होना पड़े या थोड़ा सहन करना पड़े। मन में यह स्पष्टता आती है कि सही कर्म ही कल सही परिणाम बनकर लौटेगा।
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ओम शांति। कोई भी काम करने से पहले 2 मिनट अपने साथ बिताएं और अपने मन की प्लानिंग करें। अपने को याद दिलाएं, मैं कर्मयोगी हूँ। मेरा हर कर्म सुखदायी होना चाहिए। कर्म तो करना है, लेकिन कोई ऐसा काम न हो जिससे किसी को दुख पहुँचे। मेरा हर बोल औरों का सम्मान बढ़ाए, उनमें हिम्मत, उमंग और उत्साह बढ़ाए। मेरी हर सोच औरों को एम्पावर करे। सिर्फ काम पूरा नहीं करना है, लेकिन सोल कॉन्शियस होकर करना है। अपने गुणों की खुशबू अपने कर्मों से फैलानी है।कोई
हमेशा याद रखें, मेरा हर कर्म मेरी तकदीर बनाता है। मेरे वर्तमान से मेरा भविष्य बन रहा है। आज जो करेंगे, वही कल लौटकर आएगा। इसलिए मुझे हर कर्म राइट करना है। चाहे अकेला भी खड़ा होना पड़े, चाहे थोड़ा सहन भी करना पड़े, लेकिन सही करना है। क्योंकि सही करेंगे, तो कल को हमारे साथ भी सब सही होगा। तो हर कर्म करने से पहले अटेंशन दें। यही कर्मयोगी की निशानी है। ओम शांति।
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