
“जब मन बार-बार सोचता है 'ये मेरे साथ ही क्यों हुआ?' – तो बैठ जाएं, और आत्मा को याद दिलाएं: "जो हो रहा है, वो परफेक्ट है, मुझे सिर्फ आगे क्या करना है वो देखना है”
यह मैडिटेशन कमेंटरी हमें हमारे असली स्वरूप—शांति—का अनुभव कराता है और याद दिलाता है कि परिस्थितियाँ हमें नहीं चलाती, बल्कि हम परिस्थितियाँ को संचालित करते हैं। यह अभ्यास हमारे मन को स्थिर बनाता है, हमें स्वीकार करना और अपनी जिम्मेदारी समझना सिखाता है। इसे सुनने के बाद भीतर से महसूस होता है कि मेरा भाग्य मेरे हाथ में है, और मैं हर परिस्थिति का सामना आसानी से कर सकता/सकती हूं।
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Life stages
ओम शांति ! कंफर्टेबल होकर बैठे.. बॉडी को रिलैक्स करें.. क्योंकि यह यात्रा शरीर की नहीं.. मन की है! अपने को याद दिलाएं.. कि मैं कौन हूं.. कॉन्शियसली एक संकल्प करें.. मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं.. और इसको फील करें.. . इस ...
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