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25/01/1969“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”23/03/1970“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”22/06/1971“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”18/07/1971“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”03/05/1972“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”20/05/1972“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”06/02/1974“परखने की शक्ति से महारथी की परख”11/07/1974“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”02/02/1975“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”18/01/1976“समर्थी दिवस के रूप में स्मृति दिवस”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”07/02/1980“विचित्र राज्य दरबार”17/10/1981“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”03/11/1981“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”27/03/1982“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”08/04/1982“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”09/01/1983“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”10/12/1984“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”24/03/1985“अब नहीं तो कब नहीं”20/01/1986“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”06/01/1988“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''18/01/2006“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''15/02/2007“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”
