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Accounts-हिसाब-किताब - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Accounts-हिसाब-किताब
43 unique murli dates in this topic
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43 murlis in हिंदी
25/01/1969
“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
22/06/1971
“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”
18/07/1971
“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
06/02/1974
“परखने की शक्ति से महारथी की परख”
11/07/1974
“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”
02/02/1975
“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”
18/01/1976
“समर्थी दिवस के रूप में स्मृति दिवस”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
07/02/1980
“विचित्र राज्य दरबार”
17/10/1981
“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”
03/11/1981
“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
08/04/1982
“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
03/12/1984
“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”
10/12/1984
“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
20/01/1986
“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
21/10/1987
“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
07/03/1990
“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
18/01/2003
“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
18/01/2006
“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
15/02/2007
“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”
02/02/2008
“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”