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विश्वसेवा बेहद की सेवा - World service Unlimited Service - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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विश्वसेवा बेहद की सेवा - World service Unlimited Service
विश्वसेवा बेहद की सेवा - World service Unlimited Service
48 unique murli dates in this topic
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47 murlis in हिंदी
11/06/1970
“विश्वपति बनने की सामग्री”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
27/09/1971
“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”
18/10/1971
“दीपमाला - चैतन्य दीपकों की माला की यादगार”
24/05/1972
“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
28/07/1972
“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
13/09/1975
“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”
07/01/1977
“विश्व-कल्याणकारी कैसे बनें?”
26/04/1977
“स्वतन्त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
10/12/1978
“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
28/04/1982
“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
01/06/1983
“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
09/05/1984
“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”
28/01/1985
“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
06/11/1987
“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
01/04/1992
“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
28/03/2002
“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
18/01/2004
“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''
02/02/2004
“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''
18/01/2005
“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
18/03/2008
“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”
20/10/2008
“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”