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11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”01/03/1971“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”27/09/1971“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”18/10/1971“दीपमाला - चैतन्य दीपकों की माला की यादगार”24/05/1972“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”21/06/1972“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”28/07/1972“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”04/08/1972“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”13/09/1975“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”07/01/1977“विश्व-कल्याणकारी कैसे बनें?”26/04/1977“स्वतन्‍त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”10/12/1978“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”04/02/1980“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”28/04/1982“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”04/05/1983“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”01/06/1983“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”03/12/1983“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”09/05/1984“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”28/01/1985“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”18/02/1986“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”13/03/1986“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”29/03/1986“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”06/11/1987“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”01/04/1992“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''18/01/2004“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''18/01/2005“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''18/03/2008“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”20/10/2008“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”

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