हिंदी Murlis — 1983
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03/01“हर गुण, हर शक्ति को निजी स्वरूप बनाओ बाप समान बनो”06/01“निरन्तर सहज योगी बनने की सहज युक्ति”09/01“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”11/01“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”13/01“स्वदर्शन चक्रधारी ही चक्रवर्ती राज्य भाग्य के अधिकारी”15/01“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”21/01“संगम पर बाप और ब्राह्मण सदा साथ साथ”26/01“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”15/02“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”18/02“सदा उमंग-उत्साह में रहने की युक्तियाँ”21/02“शान्ति की शक्ति”24/02“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”27/02“संगमयुग पर श्रृंगारा हुआ मधुर अलौकिक मेला”01/03“विश्व के हर स्थान पर आध्यात्मिक लाइट और ज्ञान जल पहुँचाओ”21/03“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”27/03“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”30/03“सहजयोगी बनने का साधन - अनुभवों की अथॉरिटी का आसन”03/04“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”05/04“सर्व वरदान आपका जन्म-सिद्ध अधिकार”07/04“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”11/04“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”13/04“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”14/04“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”17/04“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”19/04“संगमयुग का प्रभु फल खाने से सर्व प्राप्तियाँ”21/04“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”24/04“रूहानी पर्सनैलिटी”27/04“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”30/04“परम पूज्य बनने का आधार”02/05“माया को दोषी बनाने के बजाए मास्टर रचता, शक्तिशाली बनो”04/05“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”07/05“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”09/05“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”11/05“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”15/05“उड़ती कला में जाने की विधि और पुण्य आत्माओं की निशानियां”17/05“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”19/05“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”23/05“छोड़ो तो छूटो!”25/05“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”01/06“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”30/07“जहाँ सच्चा स्नेह है वहाँ दु:ख की लहर नहीं”10/11“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”01/12“सुख, शान्ति और पवित्रता के तीन अधिकार”03/12“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”05/12“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”07/12“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”12/12“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”14/12“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”19/12“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”21/12“तुरत दान महापुण्य का रहस्य”23/12“डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त”25/12“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”27/12“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”29/12“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”31/12“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
