अंबाला शहर के जग्गी कॉलोनी स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सुप्रीम लाइट हाउस में राजयोगिनी बीके दिव्या दीदी एवं राजयोगिनी बीके मीरा दीदी के नेतृत्व में विराट संत सम्मान सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर उदार हृदय महासंतों एवं विचारकों को विशेष आमंत्रण दिया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय अध्यात्म द्वारा सनातन संस्कृति की स्थापना’ रहा, जिसमें भगवान की श्रीमत पर अद्भुत नव प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पर उपस्थित संतजन एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। ब्रह्माकुमारी बहनों ने सभी महानुभावों का स्वागत बैज, पुष्पमालाओं एवं पटकों द्वारा किया। इस संत सम्मेलन में 400 से अधिक भाई-बहनों की भागीदारी रही तथा पानीपत जिले के मंदिरों के सभी पुजारियों ने भी सम्मिलित होकर वातावरण को और गरिमामय बनाया।
मुख्य बिंदु एवं संदेश:
- संतों एवं धार्मिक नेताओं ने आध्यात्मिक एकता पर जोर देते हुए जीवन में अध्यात्म की पुनर्स्थापना हेतु ब्रह्माकुमारीज के प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
- सभी संतों ने एक स्वर में भारत को स्वर्णिम बनाने एवं विश्व में शांति स्थापना का संकल्प लिया।
- माउंट आबू से पधारे अंतर्राष्ट्रीय संयोजक राजयोगी बीके रामनाथ भाई ने कहा कि भारत आज विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित है और संपूर्ण विश्व राजयोग की ओर आकर्षित हो रहा है। उन्होंने बताया कि केवल पाँच सेकंड में भी राजयोग का अभ्यास जीवन को स्थिर और उन्नत बना सकता है।
- राजयोगिनी बीके लक्ष्मी दीदी ने समाजसेवा और सनातन संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भले ही हमारी पूजा-पद्धतियाँ अलग हों, किंतु हम सब एक पिता की संतान हैं।
- आचार्य महामंडलेश्वर कमल किशोर जी ने कहा कि आत्मा के गुण परमात्मा से मिलते हैं और ‘ॐ शांति’का महामंत्र ही वास्तविक शांति का आधार है।
- आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने संदेश दिया कि यदि मनुष्य अपने सतोगुण को धारण कर ले तो सभी दुखों से मुक्ति संभव है।
- सरदार ज्ञानी शेर सिंह जी ने कहा कि ब्रह्म दृष्टि रखने वाला हर आत्मा में श्रेष्ठता ही देखता है।
सम्मेलन की विशेषताएँ:
- अनेक प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेताओं एवं संत-महात्माओं की पावन उपस्थिति रही, जिनमें आचार्य महामंडलेश्वर श्री कमल किशोर जी, आचार्य स्वामी श्री राजेश्वरानन्द जी, आचार्य स्वामी कैलाश स्वरूपानन्द जी महाराज, देवज्ञ महर्षि आचार्य ती निशांत जी, आचार्य श्री सनातन पंत्री चैतन्य जी महाराज, सरदार ज्ञानी शेर सिंह जी, स्वामी श्री अनुभवानन्द गिरिजी महाराज, बाबा ठाकुरदास जी महाराज, बीके राजयोगी श्राता रामनाथ जी, बीके राजयोगिनी लक्ष्मी दीदी जी, महन्त श्री भीम पुरी जी महाराज प्रमुख रहे।
- सम्मेलन के दौरान ध्यान, योग एवं आत्म-जागरूकता पर विशेष आध्यात्मिक सत्र आयोजित किए गए।
- मंच संचालन ब्रह्माकुमारी शैली दीदी एवं अरविंद भाईजी ने कुशलतापूर्वक किया।
- नन्ही बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत नृत्य ने वातावरण को और मंगलमय बनाया।
- समापन पर सभी महामंडलेश्वरों एवं संतों को मोतियों की मालाएँ, दुष्याले एवं ईश्वरीय सौगात भेंट कर सम्मानित किया गया।
यह सम्मेलन आध्यात्मिक एकता, सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना और विश्व शांति के संकल्प* का प्रेरणादायी प्रतीक बनकर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।



























