दिनांक 20 अक्टूबर 2025 को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय एवं वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट के देशभर के सेवा केंद्रों — बलौद, भुवनेश्वर यूनिट–9, शाहाबाद मार्कंडा, फगवाड़ा, पुणे शांतिकुंज, गाडरवारा, इंदौर खजराना, रतलाम गौरव पैलेस (आनंदम विभाग), पांवटा साहिब और रुड़की — में दीपावली पर्व आध्यात्मिक उमंग और दिव्यता के वातावरण में मनाया गया।
बलौद के आत्म ज्ञान भवन में लगभग 150 भाई-बहनों ने भाग लिया और दिव्यता के दीप जलाकर आंतरिक प्रकाश फैलाने का संकल्प लिया।
भुवनेश्वर यूनिट–9 के ओम निवास में 250 से अधिक भाई-बहन एकत्र हुए। मुख्य अतिथि श्री मनोज कुमार स्वैन (अतिरिक्त आयुक्त, बी.डी.ए.) ने ब्रह्माकुमारी संगठन की समाज में शांति व सकारात्मकता लाने की सेवाओं की सराहना की। कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सामूहिक ध्यान के साथ आंतरिक दीप जलाने का संकल्प लिया गया।
शाहाबाद मार्कंडा में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी नीति दीदी जी ने दीपावली का वास्तविक अर्थ बताते हुए कहा कि सच्ची दीपावली मन की अंधकार रूपी अज्ञानता को मिटाकर आत्मा को प्रकाशित करने का नाम है।
फगवाड़ा और पुणे शांतिकुंज में भी दीपावली कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न हुए, जहाँ बी.के. उर्मिला दीदी ने कहा कि जब आत्मा रूपी दीपक परमात्मा ज्योति से जुड़ता है, तभी जीवन में सच्चा प्रकाश आता है।
गाडरवारा सेवा केंद्र में भव्य आयोजन हुआ जिसमें नगर के गणमान्य नागरिकों और 225 से अधिक लाभार्थियों ने भाग लिया। इंजीनियर जवाहर शर्मा जी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि सच्ची दिवाली घर की नहीं, मन की सफाई से आरंभ होती है।
इंदौर खजराना केंद्र में 50 भाई-बहनों ने परमात्म स्मृति के दीप जलाए, जबकि रतलाम आनंदम विभाग द्वारा “हर घर दीपावली” कार्यक्रम के अंतर्गत साधनहीन परिवारों को पूजन सामग्री वितरित की गई। इस सेवा में कलेक्टर सुश्री मिशा सिंह एवं बी.के. मनोरमा दीदी सहित अनेक भाई-बहन सम्मिलित हुए।
पांवटा साहिब और रुड़की केंद्रों पर भी दीपावली के अवसर पर बी.के. गुरुचरण दीदी व बी.के. पारुल दीदी ने शुभ संकल्पों और आत्मज्योति को जीवन में धारण करने का संदेश दिया। रुड़की में लगभग 650 लाभार्थियों ने सहभागिता की।
इन सभी केंद्रों पर हुए दीपोत्सवों ने एक ही संदेश दिया —
“सच्ची दीपावली बाहरी दीपों से नहीं, आत्मा रूपी दीप को परमात्मा ज्ञान से प्रज्वलित करने से होती है। यही सच्चा उत्सव, सच्चा प्रकाश और सच्ची विजय है।”
























