28 मार्च 2026 को वारसी स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ORC), गुरुग्राम में स्वर मंजरी ऑडियो स्टूडियो के शुभारंभ के उपलक्ष्य में एक अत्यंत भव्य, प्रेरणादायक एवं आध्यात्मिक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। यह पावन कार्यक्रम वरिष्ठ राजयोगिनी आशा दीदी जी, चक्रधारी दीदी जी एवं शुक्ला दीदी जी के स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ। इस महत्त्वपूर्ण संकल्प के मूल प्रेरणास्रोत आदरणीय ब्रिजमोहन भाई साहब रहे, जिनकी प्रेरणा से ORC में एक सुसज्जित आध्यात्मिक संगीत स्टूडियो स्थापित करने का सपना साकार हुआ। इस अवसर पर देश के विभिन्न स्थानों से आए वरिष्ठ भाई-बहन, कलाकार, संगीतकार एवं साधक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रसिद्ध कलाकारों की भावपूर्ण संगीत संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें 1,200 से अधिक उपस्थितजनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत दिव्य, उत्साहपूर्ण एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा, जहां संगीत, भक्ति और राजयोग का सुंदर समन्वय अनुभव किया गया। प्रारंभ में वरिष्ठों द्वारा यह प्रेरणादायक संदेश दिया गया कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है, जो जीवन को आनंदमय, संतुलित एवं प्रेरणादायक बनाता है।
विशेष रूप से दादियों के समय के अनुभव साझा करते हुए बताया गया कि यज्ञ के प्रारंभिक दिनों से ही गीतों और संगीत के माध्यम से सेवा का विस्तार हुआ। उस समय दादियां स्वयं गीत गाकर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती थीं, जिससे सभी आत्माएं गहन शांति और आनंद का अनुभव करती थीं।
इस कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रहीं मुख्य अतिथि डॉ. संगीता शंकर जी, जो एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वायलिन वादक एवं संगीत शिक्षिका हैं। आपने अपनी मधुर प्रस्तुतियों एवं गहन विचारों के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आपने बताया कि संगीत और मेडिटेशन का गहरा संबंध है, क्योंकि संगीत मन को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मा को अंतर्मुखी यात्रा के लिए सक्षम बनाता है।
इस अवसर पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री वीडियो भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें ब्रह्मा बाबा से लेकर वर्तमान समय तक संगीत सेवा की सुंदर यात्रा को दर्शाया गया। इसमें दादियों के दुर्लभ दृश्य, पुराने गीतों की झलकियां एवं ORC में संगीत सेवा के विकास को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर सभी उपस्थितजन भाव-विभोर हो गए।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ सेवाधारी भाइयों एवं कलाकारों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से बीके डॉ. विवेक जी, सीए ललित भाई जी, सतीश भाई जी, नितिन भाई जी, हरीश मोयल जी, बृजेश मिश्रा जी, रीना दीदी जी, अविनाश भाई जी, हिमांशी बहन, हंसी विश्वकर्मा सहित अनेक कलाकारों को ईश्वरीय सौगात एवं सम्मान पत्र प्रदान कर उनकी उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना की गई।
संगीतमय प्रस्तुतियों में भक्ति और आत्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। विभिन्न कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गीतों ने सभी को गहराई से भाव-विभोर कर दिया। गीतों के माध्यम से यह संदेश अनुभव कराया गया कि परमात्मा की याद जीवन के हर कार्य को सहज और सफल बना देती है—
“तुम्हारी याद से बाबा मेरा हर काम होता है,
विघ्न सब दूर हो जाते, दिल को आराम होता है।”
इस अवसर पर यह संकल्प भी लिया गया कि स्वर मंजरी स्टूडियो के माध्यम से आध्यात्मिक संगीत सेवा को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा, जिससे समाज में सकारात्मकता, शांति एवं श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का प्रसार हो सके।
कार्यक्रम के समापन में सभी ने सामूहिक रूप से बाबा की याद में योग किया तथा अगले दिन प्रातःकाल होने वाले स्वर मंजरी स्टूडियो के औपचारिक उद्घाटन, अमृतवेला, मुरली क्लास एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम में सम्मिलित होने का स्नेहिल निमंत्रण दिया गया।
यह संपूर्ण आयोजन अत्यंत सफल, प्रेरणादायक एवं आत्मिक आनंद से परिपूर्ण रहा, जिसने सभी के हृदय में संगीत के माध्यम से ईश्वरीय सेवा करने का नया उत्साह एवं दृढ़ संकल्प जागृत किया।































