ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में महादेव नगर सेवा केंद्र एवं राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के कला एवं संस्कृति प्रभाग द्वारा वैश्विक संस्कृति, प्रेम, शांति एवं सद्भावना परियोजना के अंतर्गत गुजरात राज्य स्तरीय ‘पारिवारिक सद्भावना जागृति अभियान’ का शुभारंभ अहमदाबाद स्थित सरदार पटेल स्मारक ऑडिटोरियम, शाहीबाग में गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर अभियान को अपना समर्थन प्रदान किया।
कला एवं संस्कृति प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा बीके चंद्रिका दीदी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि
वर्तमान समय में परिवारों में प्रेम, संवाद, सम्मान और सद्भाव की पुनर्स्थापना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि प्रेम, शांति और सद्भावना ही ऐसे आध्यात्मिक मूल्य हैं, जो टूटते हुए संबंधों को पुनः जोड़ सकते हैं तथा समाज को सशक्त बना सकते हैं।
पूर्व कुलपति डॉ. निर्जा गुप्ता ने
परिवार की मजबूती के लिए संवाद, परस्पर सम्मान एवं सहयोग को आवश्यक बताया। वहीं पद्मश्री कवि तुषार शुक्ल ने इस अभियान को समय की आवश्यकता बताते हुए इसके संदेश को विशेष रूप से युवा पीढ़ी तक पहुँचाने पर बल दिया।
अभिनेता, निर्देशक एवं लेखक दीपक अंताणी ने कहा कि
आधुनिक जीवनशैली और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करना ही स्वस्थ एवं सशक्त समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का प्रथम परिचय उसके परिवार से होता है और परिवार ही उसके व्यक्तित्व के निर्माण का मूल आधार है।
इस अवसर पर इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका बीके हेमलता दीदी ने
परिवार में प्रेम, सम्मान और सहयोग को जीवन का आधार बताते हुए आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। कला एवं संस्कृति प्रभाग की क्षेत्रीय संयोजिका बीके तृप्ति बहन ने उपस्थित सभी को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराते हुए आंतरिक शांति एवं सकारात्मक सोच का अनुभव कराया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा भारतीय संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों पर आधारित आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों का मन मोह लिया।
आयोजकों ने जानकारी दी कि आगामी दिनों में पारिवारिक सद्भावना जागृति अभियान को पूरे गुजरात में विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं तथा आवासीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से चलाया जाएगा, जिससे परिवारों में प्रेम, संवाद, सहयोग एवं आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ किया जा सके।
यह अभियान समाज में पारिवारिक एकता, आध्यात्मिक जागरूकता तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध होगा।



























