15 जुलाई 2026 को विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ के यूथ विंग द्वारा संगम भवन सेवा केंद्र, ग्वालियर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ आध्यात्मिक एवं जीवन कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित करना था, जिससे वे रोजगार, उद्यमिता, नवाचार तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके डॉ. गुरुचरण सिंह ने कहा कि
संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाए जाने वाले विश्व युवा कौशल दिवस का उद्देश्य युवाओं को विभिन्न कौशलों से सशक्त बनाकर राष्ट्र एवं समाज के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र अपनी युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा देकर समग्र विकास की ओर अग्रसर हो सकता है।
बीके प्रहलाद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि
वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में आध्यात्मिक कौशल युवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, नैतिक मूल्यों तथा आंतरिक शक्तियों का विकास होता है, जिससे व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकता है।
बीके जीतू ने युवाओं को
आत्म-प्रबंधन, तनाव प्रबंधन, प्रभावी संवाद कौशल, टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता तथा सही निर्णय लेने की योग्यता विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता तभी संभव है जब मन और बुद्धि एकाग्र हों, ईश्वर से जुड़ाव हो तथा व्यक्ति आंतरिक गुणों एवं शक्तियों से सुसज्जित हो। चाहे विद्यार्थी जीवन हो, नौकरी हो अथवा कोई अन्य लक्ष्य, आध्यात्मिक सशक्तिकरण सफलता की मजबूत आधारशिला है।
वक्ताओं ने युवाओं के समग्र विकास के चार प्रमुख आयाम—शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास—पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संतुलित व्यक्तित्व निर्माण के लिए इन सभी क्षेत्रों का समान रूप से विकास आवश्यक है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास तथा आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को अपनाकर स्वयं के व्यक्तित्व विकास, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।























