गुरुग्राम स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ओआरसी) में शिक्षक दिवस के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षाविद सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। “The Power of Now” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर, प्रधानाचार्य एवं शिक्षाविदों ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिक चेतना और आधुनिक तकनीक के संतुलन पर विचार-मंथन किया।
ओआरसी की निदेशिका बी.के. आशा दीदी ने कहा कि
वर्तमान समय सकारात्मक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली क्षण है। सम्मेलन में विभिन्न शिक्षाविदों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच मानसिक व्यायाम, नैतिक चेतना तथा मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं ने कहा कि
शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि शिक्षार्थी के आंतरिक विकास और शिक्षक की सकारात्मक मानसिक अवस्था पर भी आधारित होनी चाहिए। उन्होंने तकनीकी शिक्षा के साथ आध्यात्मिक शक्ति एवं मानवीय मूल्यों के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।
बी.के. सिस्टर शिवानी ने
“Reset Your Mindset for Emotional Well-Being” विषय पर विशेष सत्र को संबोधित करते हुए आत्म-पहचान और भावनात्मक संतुलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि अहंकार स्वयं की गलत पहचान से उत्पन्न होता है और वास्तविक पहचान यह है कि “I am a Soul, I am an Energy.” उन्होंने शरीर, संबंधों और भूमिकाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए स्वयं को उनसे अलग आत्मिक सत्ता के रूप में पहचानने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सिरसा स्थित ब्रह्माकुमारीज़ आनंद सरोवर की प्रभारी बी.के. बिंदु दीदी ने शिक्षाविदों को राजयोग एवं ध्यान की गहन अनुभूति कराई। वहीं माउंट आबू से आईं शिक्षा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बी.के. सुमन ने शिक्षा प्रभाग द्वारा की जा रही सेवाओं की जानकारी साझा की।
सम्मेलन में शिक्षाविदों ने भारत को विश्व गुरु बनाने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए शिक्षा में आध्यात्मिकता, नैतिक मूल्यों और आधुनिक तकनीक के संतुलित समावेश की आवश्यकता व्यक्त की। सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को आंतरिक शक्ति, सकारात्मक सोच और मूल्य आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रेरित करना रहा।






























