9 से 12 अप्रैल 2026 तक आबू रोड स्थित ज्ञान सरोवर में ब्रह्माकुमारीज़ के आईटी विंग द्वारा आयोजित ‘एंपावरिंग द सेल्फ’ आध्यात्मिक रिट्रीट का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस विशेष आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए आईटी लीडर्स एवं प्रोफेशनल्स ने सहभागिता करते हुए आत्मशक्ति, मानसिक स्पष्टता एवं आंतरिक शांति का गहन अनुभव किया।


अरावली पर्वतमालाओं की शांत और पवित्र वादियों में आयोजित इस रिट्रीट में वरिष्ठ राजयोग शिक्षकों और प्रशिक्षकों ने सभी को सहज और गहन आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया। इस दौरान राजयोगिनी बी.के. आशा दीदी, सुरज भाईजी और बी.के. शिवानी दीदी के प्रेरणादायक सत्रों ने प्रतिभागियों के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया। उनके क्लासेस में जीवन के गहरे आध्यात्मिक सिद्धांतों को बहुत ही सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया गया, जिससे प्रतिभागियों को उन्हें अपने रोज़मर्रा के जीवन में अपनाने की स्पष्ट दिशा मिली।


कार्यक्रम में राजयोग ध्यान का व्यवहारिक अभ्यास कराया गया तथा आत्मचिंतन के लिए विशेष समय प्रदान किया गया, जिससे प्रतिभागी अपने भीतर की शक्तियों से पुनः जुड़ सके। सात्विक भोजन एवं सकारात्मक वातावरण ने पूरे कार्यक्रम को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया।



संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. सुदेश दीदी के सानिध्य में आयोजित इस रिट्रीट में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव अत्यंत भावपूर्ण तरीके से साझा किए।


एक प्रतिभागी ने कहा कि इस रिट्रीट ने उन्हें यह समझने में मदद की कि
हम कहां से आए हैं, हमें कहां जाना है और जीवन में हमारा वास्तविक कर्तव्य क्या है। उन्होंने जीवन को एक नाटक के रूप में समझाते हुए कहा कि जैसे किसी नाटक में श्रेष्ठ भूमिका निभाने वाला ही सच्चा हीरो कहलाता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में श्रेष्ठ कर्म कर एक आदर्श भूमिका निभानी है।
कई प्रतिभागियों ने साझा किया कि वे इस रिट्रीट में कुछ अपेक्षाओं के साथ आए थे,
लेकिन यहां उन्हें जो अनुभव मिला वह उनकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक था। उन्होंने कहा कि “यह अनुभव कल्पना से परे था, हमने जितना सोचा था उससे कहीं अधिक पाया।”
एक अन्य प्रतिभागी ने भावुक होकर कहा कि
दूसरों के अनुभव सुनते हुए उन्हें एहसास हुआ कि वास्तव में इस ज्ञान की सबसे अधिक आवश्यकता उन्हें स्वयं को थी। उन्होंने बताया कि यह रिट्रीट उनके लिए आत्मबोध का एक महत्वपूर्ण अवसर बना, जिसने उन्हें अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा दी।
प्रतिभागियों ने यहां के वातावरण की विशेष सराहना करते हुए कहा कि
जहां वे अपने दैनिक जीवन में तनाव और कभी-कभी आपसी मतभेदों का अनुभव करते थे, वहीं ज्ञान सरोवर में उन्हें हर ओर प्रेम, शांति और अपनापन महसूस हुआ। एक प्रतिभागी ने कहा कि “यहां हर क्षण ऐसा लगा जैसे सभी मुस्कान के साथ स्वागत कर रहे हों, और यह अनुभव हृदय को छू लेने वाला था।”
उन्होंने यह भी साझा किया कि
अमृतवेला ध्यान एवं विभिन्न सत्रों ने उनके जीवन में गहरा परिवर्तन लाया। एक प्रतिभागी ने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि “ज्ञान सरोवर को केवल ज्ञान सरोवर नहीं, बल्कि ज्ञान का सागर कहना अधिक उपयुक्त होगा।”
प्रतिभागियों ने यह भी अनुभव किया कि जीवन में
समस्याएं आना स्वाभाविक है, लेकिन यदि हम थोड़ी देर रुककर ध्यान और आत्मचिंतन करें, तो हम न केवल मानसिक रूप से संतुलित रह सकते हैं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी आगे बढ़ सकते हैं।

समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने इस आध्यात्मिक यात्रा को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बताते हुए संस्था एवं सभी सेवाधारियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे यहां प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में अपनाकर एक प्रैक्टिकल उदाहरण बनेंगे और इस दिव्य ज्ञान को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
इस प्रकार, यह रिट्रीट केवल एक कार्यक्रम न होकर आत्मपरिवर्तन, आत्मजागृति एवं आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ।























