16 मई 2026 को ब्रह्माकुमारीज़ के राजस्थान स्थित मुख्यालय ज्ञान सरोवर, माउंट आबू में कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग द्वारा “आध्यात्मिकता द्वारा सशक्त किसान और समृद्ध गांव” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों एवं ग्रामीण समाज को आध्यात्मिक मूल्यों, सकारात्मक सोच एवं आत्मबल के माध्यम से सशक्त बनाकर समृद्ध गांवों की स्थापना हेतु प्रेरित करना रहा।
उद्घाटन सत्र में प्रभाग के उपाध्यक्ष बी के राजू भाई ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उद्घाटनकर्ता के रूप में गदक स्थित रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायत राज यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुरेश वी. नाडागोडार तथा विशिष्ट अतिथि गुजरात प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड, गांधीनगर के अध्यक्ष हितेश भाई पटेल उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने कृषि एवं ग्रामीण विकास में आध्यात्मिक मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि
वर्तमान समय में गांवों के विकास हेतु सरकारें अनेक योजनाएं चला रही हैं तथा प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, किंतु वास्तविक समृद्धि तभी संभव है जब किसान आत्मिक रूप से सशक्त, चरित्रवान एवं सकारात्मक चिंतन वाला बने। उन्होंने किसानों के जीवन में आध्यात्मिकता, संस्कार एवं नैतिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. सुरेश वी. नाडागोडार ने
विद्यार्थियों को कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रायोगिक प्रशिक्षण एवं अनुभवात्मक शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे युवाओं को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार प्रदान करने वाले बनें।
विशिष्ट अतिथि हितेश भाई पटेल ने
पर्यावरण संरक्षण एवं भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश देते हुए सभी से संकल्प करवाया कि जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा अन्य शुभ अवसरों पर कम से कम पांच पेड़ लगाने का संकल्प लें तथा भारतीय संस्कृति के अनुरूप प्रकृति एवं गौसेवा को अपनाएं।
मुख्य वक्ता के रूप में कृषि निदेशालय, लखनऊ के पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर बी के बद्री विशाल भाई ने
किसानों के जीवन में आत्मविश्वास, सकारात्मक दृष्टिकोण एवं आध्यात्मिकता के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब किसान योगयुक्त होकर कार्य करता है तो उसका संबंध प्रकृति एवं परमात्मा दोनों से जुड़ जाता है, जिससे उसके कार्यों में श्रेष्ठता, मानसिक शांति, बेहतर निर्णय क्षमता एवं पारिवारिक प्रेम बढ़ता है।
इस अवसर पर संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी के सुदेश दीदी एवं संस्था के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बी के डॉ. मृत्युंजय भाई जी ने
अपने आशीर्वचनों में कहा कि आध्यात्मिकता आत्मा, परिवार, समाज एवं राष्ट्र के समग्र विकास का आधार है। उन्होंने बताया कि किसानों की आर्थिक उन्नति के अनेक प्रयासों के बावजूद अपेक्षित परिणाम न मिलने का मुख्य कारण आध्यात्मिकता की कमी है।
प्रभाग की अध्यक्ष बी के सरला दीदी ने प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि
आध्यात्मिक ज्ञान एवं योग के माध्यम से कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाकर राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय संयोजिका बी के तृप्ति बहन ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन मुख्यालय संयोजक बी के सुमन भाई द्वारा व्यक्त किया गया।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से बड़ी संख्या में किसान, कृषि विशेषज्ञ एवं ग्रामीण विकास से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।



























