18 दिसंबर 2025 को ब्रह्मा कुमारीज़ के सुरक्षा सेवा प्रभाग द्वारा ज्ञान शिखर ओम शांति भवन में आयोजित प्रेरणादायी कार्यक्रम “अद्भुत शौर्य गाथा” में शौर्य, साहस, राष्ट्रभक्ति एवं आत्मिक शक्ति का प्रभावशाली संगम देखने को मिला। इस अवसर पर एनसीसी, एनएसएस, आरएपीटीसी प्रथम एवं 15वीं बटालियन, भारत स्काउट एंड गाइड तथा पुलिस जवानों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परमवीर चक्र से सम्मानित, ऑपरेशन विजय कारगिल के नायक भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने अपने ओजस्वी विचार साझा करते हुए कहा कि
मिलती है वर्दी जिनको, वे वास्तव में किस्मत वाले होते हैं। उनके कारण ही देशवासी रातों को चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास वीर सैनिकों के बलिदानों से भरा पड़ा है और एक सैनिक अपने लहू की एक-एक बूंद तथा जीवन की एक-एक श्वास देश की रक्षा के लिए समर्पित कर देता है।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज इंटरनेट सबके हाथ में है, लेकिन अधिकतर लोग फिल्मी सितारों या क्रिकेटरों को ही खोजते हैं, जबकि भारत माता के उन सच्चे सपूतों को शायद ही याद करते हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। उन्होंने मन की शांति और विचारों की स्थिरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब मन और मस्तिष्क शांत होते हैं, तभी व्यक्ति परमात्मा से प्राप्त शक्तियों का सही अनुभव कर सकता है।
कार्यक्रम में सभी का स्वागत करते हुए इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका बी.के. हेमलता दीदी ने कहा कि भारतीय सैनिकों के त्याग और बलिदान के कारण ही आज हमारा देश सुरक्षित है। उन्होंने देशप्रेम की सच्ची परिभाषा बताते हुए कहा कि सैनिक अपने परिवार और स्वयं की चिंता छोड़कर केवल भारत माता की रक्षा के लिए सीमा पर डटे रहते हैं। ऐसे महान योद्धाओं के अनुभव युवाओं को जीवन में नई दिशा और प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर जबलपुर से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल विकास राव चौहान ने कहा कि ऐसे प्रेरक प्रसंग जीवन को भीतर झांकने और आत्मचिंतन करने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पश्चात बी.के. भुवनेश्वरी द्वारा सभी को राजयोग ध्यान की गहन अनुभूति कराई गई, जिससे उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने शांति, स्थिरता और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि भारत मां के युवाओं में अपार सामर्थ्य है। यदि उनके हाथों में कलम की शक्ति आए तो वे नया इतिहास लिख सकते हैं और यदि तलवार की शक्ति आए तो इतिहास रच सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में युवाओं को यह संदेश दिया गया कि “मैं कौन हूं — मैं एक आत्मा हूं, और अपने परमपिता परमात्मा से जुड़कर जीवन की हर जंग में विजयी बन सकता हूं।”
यह कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, आत्मबल एवं आध्यात्मिक सशक्तिकरण की भावना को प्रगाढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।



























