ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवा केन्द्र, काठमांडू द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर एक भव्य आध्यात्मिक प्रवचन एवं चैतन्य झाँकी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में अनेकों श्रद्धालुओं ने सहभागी होकर आध्यात्मिकता और संस्कृति का दिव्य अनुभव किया।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि माननीय उपराष्ट्रपति श्री रामसहाय प्रसाद यादव रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक परंपरा का निर्वाह नहीं है, बल्कि यह पर्व सम्पूर्ण मानव समाज को किसी भी प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर निष्काम भाव से अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करने की कर्मयोग की शिक्षा देने वाला ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने आगे कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन चरित्र अन्याय, अत्याचार, अधर्म और असत्य का अंत कर सत्य, सदाचार, भ्रातृत्वभाव, अहिंसा और आध्यात्मिक मूल्यों से परिपूर्ण समाज की स्थापना के लिए प्रेरणा देता है।
माननीय उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि गीता का ज्ञान आज के तनाव, चिंता, भय और अशांति से भरे युग में शांति, निर्भयता, स्थितप्रज्ञता एवं सदाचारी जीवन पद्धति प्रदान करता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
अपने अध्यक्षीय प्रवचन में ब्रह्माकुमारीज नेपाल की निदेशिका डॉ. राज दिदी ने कहा कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व अनेक दिव्य गुणों और सद्विवेक का सजीव स्वरूप है। उनका जीवन निर्मल, निश्चल और श्वेत रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे केवल श्रीकृष्ण की महिमा गाने तक सीमित न रहकर उनके समान गुणवान और चरित्रवान बनने का संकल्प लें।
कार्यक्रम में बी.के. रामसिंह, बी.के. तिलक और बी.के. किशोर ने भी श्रीकृष्ण के दिव्य व्यक्तित्व पर अपने विचार रखे। इसी अवसर पर श्रीकृष्ण–श्रीराधा की चैतन्य झाँकी का आकर्षक आयोजन किया गया तथा कलाकार बहनों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक नृत्य एवं रासलीला ने सभी को भावविभोर कर दिया।
यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक जागृति और आध्यात्मिक अनुभूति का एक अनुपम अवसर सिद्ध हुआ।





























