विश्व शांति धाम सेवा केंद्र, कुरुक्षेत्र में तीन दिवसीय विहासा प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

6 जुलाई 2026 को कुरुक्षेत्र स्थित ब्रह्माकुमारीज़ विश्व शांति धाम सेवा केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय विहासा (W.H.O.L.I.S.T.I.C. Health) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को राजयोग मेडिटेशन तथा जीवन मूल्यों के माध्यम से तनावमुक्त, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देना था।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करतार सिंह धीमान, सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह, विहासा कार्यक्रम के फैसिलिटेटर डॉ. सचिन परब, विश्व शांति धाम सेवा केंद्र की प्रभारी बीके सरोज बहन, डॉ. आर. डी. शर्मा, बीके सुप्रिया तथा बीके राधिका सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान बीके सुप्रिया ने विहासा परियोजना का परिचय देते हुए उसके उद्देश्यों एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. सचिन परब ने राजयोग मेडिटेशन के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि मानसिक तनाव, असंतोष एवं आंतरिक अशांति का स्थायी समाधान आध्यात्मिक सशक्तिकरण एवं राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से ही संभव है।


अन्य वक्ताओं ने भी मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन तथा मूल्य आधारित जीवनशैली में राजयोग की प्रभावी भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उपस्थित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रशिक्षण समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे तथा भविष्य में अधिक से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
एनआईटी कुरुक्षेत्र में राजयोग मेडिटेशन एवं व्यक्तित्व विकास पर विशेष प्रशिक्षण

8 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरुक्षेत्र में राजयोग मेडिटेशन एवं व्यक्तित्व विकास विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ एनआईटी के निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह, फैकल्टी वेलफेयर के डीन प्रो. मयंक दवे, थॉट लैब के समन्वयक प्रो. राजेश कुमार अग्रवाल, सह-समन्वयक प्रो. अंशु पराशर, प्रो. थान सिंह सैनी, ब्रह्माकुमारीज़ विश्व शांति धाम सेवा केंद्र की प्रभारी बीके सरोज बहन तथा डॉ. सचिन परब द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 40 प्राध्यापकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान राजयोग मेडिटेशन, तनाव प्रबंधन, आत्म-जागरूकता, आत्मसम्मान, माइंडफुलनेस तथा मूल्य आधारित जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावशाली सत्र आयोजित किए गए।

डॉ. सचिन परब ने प्रतिभागियों को
ब्रह्माकुमारीज़ की विहासा (W.H.O.L.I.S.T.I.C. Health) परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को आंतरिक रूप से सशक्त एवं हील कर सकता है। उन्होंने सकारात्मक, शांतिपूर्ण एवं सम्मानपूर्ण विचारों तथा संवाद की शक्ति पर बल देते हुए कहा कि जब हम दूसरों को सकारात्मक दृष्टिकोण से सुनते और समझते हैं, तब व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।
उन्होंने आगे कहा कि
मेडिटेशन का प्रथम उद्देश्य स्वयं को शांति का अनुभव कराना है। भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "जैसा हमारे भीतर होगा, वैसा ही हमारे व्यवहार और कर्मों में दिखाई देगा।" इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर शांति, सकारात्मकता एवं श्रेष्ठ संस्कारों का विकास करना चाहिए, जिससे व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन अधिक सुखी, स्वस्थ एवं सामंजस्यपूर्ण बन सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए अपने दैनिक जीवन में राजयोग मेडिटेशन एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।























