दिनांक 20 अक्टूबर 2025 को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विभिन्न सेवा केंद्रों — कुरुक्षेत्र दारा खेड़ा, इंदौर श्रीनगर, रतलाम गौरव पैलेस कॉलोनी, औल (ओडिशा) एवं इंदौर राजेंद्र नगर — में दीपावली पर्व बड़े हर्षोल्लास, उमंग और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया।
कुरुक्षेत्र दारा खेड़ा सेवा केंद्र पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी ने सभी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दीपावली आत्मा की ज्योति को जगाने और ज्ञान का प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। उन्होंने शुभ संकल्पों के दीप जलाने का संदेश दिया। बहन लता जी ने पाँच दिवसीय पर्व के आध्यात्मिक रहस्यों को स्पष्ट किया और मन, वचन, कर्म की पवित्रता को दीपावली का सच्चा अर्थ बताया। 200 से अधिक भाई-बहनों ने भाग लिया।
इंदौर श्रीनगर केंद्र पर दीपोत्सव के अवसर पर 60 लाभार्थियों ने भाग लिया। विशेष अतिथि डॉ. मुक्ता जैन (SNS हॉस्पिटल की निदेशक) ने दीपावली की शुभकामनाएँ दीं और सकारात्मक विचारों द्वारा जीवन को प्रकाशित करने का संदेश दिया।
रतलाम गौरव पैलेस कॉलोनी के भाग्योदय भवन सेवा केंद्र में "दीप मिलन समारोह" का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि बहन कुसुम चाहर जी (शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष) ने कहा कि यहाँ का वातावरण इतना दिव्य है कि विचार स्वयं बदलने लगते हैं। अध्यक्षता करते हुए राजयोगिनी मनोरमा दीदी ने कहा कि स्वर्णिम युग लाने के लिए मन को ईर्ष्या और द्वेष से मुक्त कर स्वच्छ बनाना होगा। लगभग 70 भाई-बहनों ने भाग लिया।
औल (ओडिशा) के आद्याशक्ति भवन में दीपावली अवसर पर स्नेह मिलन समारोह हुआ। सेवाकेंद्र प्रभारी ब्र. कु. संयुक्ता बहन ने दीपावली का आध्यात्मिक रहस्य बताया, वहीं समाजसेवी भ्राता सुशांत कुमार तराई मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में 100 भाई-बहनों ने भाग लिया और फटाकों से दूरी बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इंदौर राजेंद्र नगर केंद्र पर बी.के. रक्षा बहन और बी.के. अर्चना बहन ने आत्मस्मृति और परमात्मस्मृति का गूढ़ रहस्य साझा किया। बी.के. शारदा बहन ने सभी का आभार व्यक्त किया। लगभग 150 भाई-बहनों ने भाग लेकर दीप जलाए और आंतरिक शांति के दीप प्रज्वलित किए।
इन सभी कार्यक्रमों ने मिलकर यह संदेश दिया कि सच्ची दीपावली बाहरी दीपों से नहीं, बल्कि आत्मा की ज्योति जागृत करने से होती है। देशभर के ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्रों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि हर हृदय में शांति, पवित्रता और सकारात्मकता का दीप जलाएं।




























