4 मार्च 2026 को माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय शांतिवन, ज्ञान सरोवर और पांडव भवन में होली का पर्व बहुत ही खुशी, उमंग और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया गया। देश-विदेश से आए हुए भाई-बहनों ने इस पावन अवसर पर परमात्म प्रेम के रंग में रंगकर होली का आनंद अनुभव किया। यहां होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन की अलौकिक अनुभूति के रूप में मनाई गई।

शांतिवन के विशाल डायमंड हॉल में प्रातः मुरली क्लास के पश्चात ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी के जयंती दीदी सहित बी के बीना दीदी, बी के रुक्मणी दीदी, बी के गीता दीदी एवं बी के डॉ. सविता दीदी ने गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर सभी को प्रेम, शांति और खुशी का रंग लगाया। इस दौरान देश-विदेश से आए भाई-बहन परमात्म प्रेम में झूमते और एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएँ देते दिखाई दिए।

वहीं ज्ञान सरोवर में संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी के सुदेश दीदी के सानिध्य में विदेशी भाई-बहनों ने भी होली का उत्सव बड़े उमंग और आध्यात्मिक भावना के साथ मनाया। सभी ने आत्मस्मृति का तिलक लगाकर अपने जीवन में ईश्वरीय गुणों और श्रेष्ठ संस्कारों को धारण करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर बी के प्रभा दीदी, बी के संतोष दीदी (रशिया), बी के रजनी दीदी (जापान) और बी के भावना दीदी (न्यूजीलैंड) सहित अनेक विदेशी भाई-बहन उपस्थित रहे।


इसी प्रकार पांडव भवन में संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी के शशि दीदी और वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी के शीलू दीदी ने सभी को होली की शुभकामनाएँ देते हुए प्रेरित किया कि हम अपने जीवन से बुरे संस्कारों को समाप्त कर प्रेम, शांति और पवित्रता के रंग से अपने जीवन को भरें। इस अवसर पर गीत, नृत्य, कविताओं और रास के माध्यम से सभी ने अपनी खुशी व्यक्त की।


देश-विदेश से आए कई भाई-बहनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मधुबन की होली बहुत ही विशेष और अलौकिक होती है। कईयों ने कहा कि उन्हें ऐसा अनुभव हुआ जैसे वे परमात्मा के प्रेम के रंग में पूरी तरह रंग गए हों और बाबा के स्नेहकी होली खेल रहे हों। इस आध्यात्मिक वातावरण में सभी ने अपने आप को बहुत ही हल्का, खुश और ईश्वरीय प्रेम से भरा हुआ महसूस किया।


इस प्रकार ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय में मनाई गई यह होली सभी के लिए खुशी, प्रेम और आध्यात्मिक उमंग से भरपूर रही, जहां हर हृदय से यही संदेश निकल रहा था कि ईश्वरीय ज्ञान और परमात्म प्रेम का रंग ही सबसे गहरा और अविनाशी है, जो जीवन को सुख, शांति और नई दिशा से भर देता है।
























