दिनांक 4 जून 2026 को ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय स्थित ज्ञान सरोवर परिसर में प्रशासनिक सेवा प्रभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “कर्म योगा फॉर एंपावरिंग एडमिनिस्ट्रेशन” का भव्य शुभारंभ यूनिवर्सल हार्मोनी हॉल में सम्पन्न हुआ। इस विशेष सम्मेलन में प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों, प्रबंधकों, कार्यपालकों एवं विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की।
उद्घाटन सत्र में प्रशासनिक सेवा प्रभाग की अध्यक्षा बीके आशा दीदी ने अपने मुख्य उद्बोधन में
कर्मयोग को श्रेष्ठ एवं प्रभावी प्रशासन की आधारशिला बताते हुए कहा कि एक सच्चा प्रशासक सद्भाव, ईमानदारी, समर्पण, स्थिरता एवं संतुलित दृष्टिकोण के साथ कार्य करता है। कर्मयोगी के कर्मों में विलक्षणता होती है और उसके निर्णय समाज के व्यापक कल्याण का माध्यम बनते हैं।
ब्रह्माकुमारीज़ की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके सुदेश दीदी ने अपने आशीर्वचन
में कहा कि प्रत्येक प्रशासक का उद्देश्य समाज को सुख देना और सुख प्राप्त करना होना चाहिए। उन्होंने राजयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने तथा श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए आध्यात्मिक चेतना आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने की।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री मनोज कुमार सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
ज्ञान सरोवर की सह-निदेशिका बीके प्रभा दीदी ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को
राजयोग मेडिटेशन का गहन आध्यात्मिक अनुभव कराया। ध्यान सत्र के माध्यम से आंतरिक शांति, मानसिक संतुलन एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि प्रशासनिक जीवन में दबाव, अनिश्चितता एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच शांत एवं संतुलित मन ही प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।
सम्मेलन के दौरान यह संदेश दिया गया कि वास्तविक सशक्तिकरण का आधार अध्यात्म है। केवल शारीरिक या बाहरी विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि आत्मिक चेतना को सशक्त बनाना भी आवश्यक है। आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित नेतृत्व ही मूल्यनिष्ठ, संवेदनशील एवं प्रभावशाली प्रशासन का निर्माण कर सकता है।
कार्यक्रम का संचालन प्रशासनिक सेवा प्रभाग के राष्ट्रीय समन्वयक बीके हरीश भाई ने किया।
उन्होंने बताया कि इस विशेष सम्मेलन का उद्देश्य प्रशासनिक क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों को आध्यात्मिक मूल्यों, कर्मयोग और राजयोग ध्यान के माध्यम से प्रभावी नेतृत्व, आत्म-परिवर्तन एवं सशक्त प्रशासन के लिए प्रेरित करना है। “स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन” के संकल्प के साथ आयोजित यह सम्मेलन भारत सहित विभिन्न देशों में मानवता के उत्थान एवं विश्वकल्याण के उद्देश्य को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
यह सम्मेलन प्रतिभागियों को आध्यात्मिक दृष्टिकोण, सकारात्मक नेतृत्व और मूल्यनिष्ठ प्रशासन के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाने की प्रेरणा प्रदान कर रहा है।
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