पुणे के जगदंबा भवन में ब्रह्माकुमारीज़ के साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट्स विंग द्वारा ‘Beyond Technology: Unlocking Human Potential’ विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक, इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 150 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मुंबई से आए बीके ई.वी. गिरीश ने
तकनीकी विकास और मानवीय क्षमताओं के बीच संतुलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने विचार रखा कि आधुनिक तकनीक जीवन को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन मनुष्य की वास्तविक खुशी, आंतरिक शांति, श्रेष्ठ मूल्य और मधुर संबंध केवल बाहरी तकनीकी प्रगति से प्राप्त नहीं किए जा सकते।
उन्होंने प्रतिभागियों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हुए आंतरिक शक्तियों को पहचानने और उन्हें सकारात्मक दिशा में उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि बाहरी दुनिया में प्रगति के साथ मनुष्य के भीतर भी सकारात्मक परिवर्तन आवश्यक है।
बीके सुनंदा दीदी ने राजयोग ध्यान की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को आत्मिक चेतना और परमात्मा से संबंध का अनुभव कराने के लिए राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि नियमित राजयोग अभ्यास से मन को शांति, खुशी, प्रेम और आत्मविश्वास की अनुभूति प्राप्त होती है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि तकनीकी विकास के साथ यदि मनुष्य अपनी आंतरिक शक्तियों, मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को विकसित करे, तो जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मकता को बढ़ाया जा सकता है।
























