दिनांक 17 नवम्बर 2025 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय, बिलासपुर में सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 के अंतर्गत प्रेरक उद्बोधन सत्र सुहाना सफ़र – An Adventure into Awareness का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम में अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन, निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास, मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री हिमांशु जैन, विभिन्न विभागाध्यक्षों, अधिकारियों-कर्मचारियों तथा श्रमसंघ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
इस प्रेरक सत्र का संचालन मुंबई से पधारी ब्रह्माकुमारी कविता दीदी, राजयोग मेडिटेशन शिक्षिका एवं आध्यात्मिक संचालिका द्वारा किया गया। उन्होंने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से जीवन प्रबंधन, आत्म-जागरूकता, नैतिक कार्य-संस्कृति, पारदर्शिता, मानसिक संतुलन तथा उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। अपने उद्बोधन में कविता दीदी ने कहा कि सतर्कता का सफ़र बाहरी नहीं; अंदर की जागृति से शुरू होता है। जब मन शांत होता है, तभी निर्णय पारदर्शी और सही दिशा में होते हैं। जवाबदेही कोई बोझ नहीं, बल्कि स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है। राजयोग मन को स्वच्छ, विचारों को सजग और जीवन को सुहाना बनाता है। जागरूकता वह शक्ति है, जो हर स्थिति में हमें संतुलित बनाए रखती है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी संस्थान की वास्तविक प्रगति उसके प्रत्येक सदस्य की आंतरिक सत्यनिष्ठा और जागरूकता पर आधारित होती है।
अवसर पर संबोधित करते हुए अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन ने कहा कि सतर्कता सप्ताह केवल कुछ दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि इसे वर्ष भर व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति आत्म-जागरूक होकर संतुलित मन से कार्य करता है, तब उसके निर्णय निष्पक्ष, सटीक और संगठन के लिए अत्यंत मूल्यवान होते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इसके पश्चात लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई एवं कोल इंडिया का कॉर्पोरेट गीत प्रस्तुत किया गया। स्वागत उद्बोधन उपमहाप्रबंधक (मानव संसाधन/जनसंपर्क/राजभाषा) श्री मनीष श्रीवास्तव ने दिया। कार्यक्रम के समापन पर महाप्रबंधक (सतर्कता/ई एंड एम) श्री नागेश्वर राव द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
यह सत्र एसईसीएल में नैतिक कार्य-संस्कृति, पारदर्शिता, आत्म-जागरूकता और आंतरिक सतर्कता को मजबूत बनाने की दिशा में अत्यंत प्रेरणादायी और प्रभावी सिद्ध हुआ।





























