दिनांक 30 जून 2026 को हैदराबाद स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शांति सरोवर रिसर्च सेंटर में मनोवैज्ञानिकों के लिए “आंतरिक शांति: मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में मनोवैज्ञानिकों, काउंसलर्स, लाइफ कोच एवं आध्यात्मिक विशेषज्ञों ने सहभागिता कर वर्तमान तनावपूर्ण जीवनशैली में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और आंतरिक शांति के विविध आयामों पर गहन चिंतन किया।
कार्यक्रम में आबूराज से पधारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी.के. शीलू दीदी ने कहा कि
वास्तविक शांति बाहरी परिस्थितियों में नहीं बल्कि मन और चेतना की अवस्था में निहित होती है। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से आत्मिक स्वरूप का अनुभव कर परमात्मा से संबंध जोड़ने पर बल दिया, जिससे मन में स्थिरता, सकारात्मकता और दिव्यता का संचार होता है।
उन्होंने यह भी संदेश दिया कि
शांति पहले स्वयं से प्रारंभ होती है—यदि व्यक्ति स्वयं शांत है तो वह अपने परिवार, समाज और राष्ट्र में भी शांति का विस्तार कर सकता है, और अंततः विश्व शांति की दिशा में योगदान दे सकता है।
प्रख्यात काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट एवं मनोजागृति संस्था की संस्थापक डॉक्टर चला गीता ने
माइंडफुलनेस, सकारात्मक चिंतन और कृतज्ञता के अभ्यास को मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
मुंबई से आए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ राजीव गुप्ता तथा स्पार्क विंग के राष्ट्रीय समन्वयक बी.के. श्रीकांत ने भी अपने विचार साझा किए और आध्यात्मिकता एवं मनोविज्ञान के समन्वय को आज की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम का संचालन स्पार्क विंग की क्षेत्रीय समन्वयक बी.के. सुमन लता द्वारा किया गया। संगोष्ठी के दौरान यह भी विचार रखा गया कि मन को नियंत्रित करने के बजाय उसे समझना, दिशा देना और सकारात्मक रूप से रूपांतरित करना अधिक प्रभावी उपाय है।
समापन संदेश में यह भाव व्यक्त किया गया कि मनोविज्ञान और आध्यात्मिकता का समन्वय व्यक्ति के आंतरिक परिवर्तन के साथ-साथ समाज में शांति और सद्भाव के विस्तार का सशक्त माध्यम बन सकता है।




























